आरोपों के बावजूद भी अजित पवार दोबारा बने महाराष्‍ट्र के उप मुख्‍यमंत्री

Ajit Pawar
मुंबई। तमाम आरोपों और विवादों के बाद एनसीपी नेता अजित पवार की महाराष्‍ट्र सरकार में बतौर डिप्‍टी सीएम फिर वापसी हो गई है। आज सुबह उन्‍होंने राजभवन में महाराष्‍ट्र के उप मुख्‍यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल के शंकर नारायणन ने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की मौजूदगी में अजित पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। हालांकि इसका कड़ा विरोध किया जा रहा है।

भाजपा और शिवसेना अजित पवार को दोबारा डिप्‍टी सीएम बनाये जाने पर बेहद नाराज हैं और शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद नहीं हुए। मालूम हो कि महाराष्‍ट्र में सिचाई घोटाले का आरोप लगने के बाद बीते सितंबर माह में अजित पवार को डिप्‍टी सीएम का पद छोड़ना पड़ा था। 70 हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले में घिरने के बाद अजित पवार सिर्फ 72 दिन सत्ता से बाहर रहे

सिचाई घोटाले पर महाराष्‍ट्र सरकार ने श्‍वेत पत्र पेश किया था जिसके बाद आज पवार को दोबारा उप मुख्‍यमंत्री बनाया गया है। शपथ समारोह के बाद पवार ने कहा कि मुझपर लगाये गये घोटालों के आरोप गलत साबित हुए हैं और मेरे कार्यकाल में तो महाराष्‍ट्र में सिचाई का क्षेत्र बढ़ा है। अजित पवार को क्लिन चिट मिलने पर कई सवाल उठ रहे हैं।

महाराष्ट्र की मुख्य विपक्षी पार्टी शिवसेना ने अजित पवार को फिर से उपमुख्यमंत्री बनाने पर एतराज जताया है। शिवसेना ने कहा है कि अजित पवार को फिर से उपमुख्यमंत्री बनाना कांग्रेस और एनसीपी का तमाशा है। शिवसेना के प्रवक्‍ता संजय राउत ने कहा कि मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने अपनी सरकार बचाने के लिए एनसीपी से सौदेबाजी की है। बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या श्वेत पत्र क्लीन चिट है? आखिर कैसे आरोपों में बावजूद अजित पवार उपमुख्यमंत्री बन गए? इस खबर पर आपकी क्‍या राय है? नीचे दिये कमेंट बॉक्‍स में जरुर लिखें।

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