कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा तट पर भिखारियों का जमावड़ा

कार्तिक पूर्णिमा पर वाराणसी के गंगा घाटों पर लगती भिखारियों की लम्बी कतारें सरकारी दावों को झुठला रही हैं। गंगा तट पर एकत्र भिखारियों की संख्या देखकर देशी विदेशी सभी यह कहने पर विवश हो गए हैं कि क्या यूपी में भिखारी बनाए जा रहे हैं। ज्ञात हो कि कार्तिक पूर्णिमा यानि गंगा स्नान के त्यौहार के अवसर पर लाखों की संख्या में लोग गंगा स्नान करेंगे एवं उसके बाद भिखारियों को दान देंगे।
दान की आशा में कार्तिक पूर्णिमा से एक दिन पूर्व ही दशाश्वमेघ घाट समेत अन्य घाटों पर भिखारियों की लम्बी लाइनें लग गयी हैं। इस घटना के कई रूप हैं एक ओर तो यह कहा जा रहा है कि गंगा तट पर भिखारियों की बढ़ती संख्या देखकर यह कहा जा रहा है कि आज के दौर में यह एक बेहतर कारोबार बन गया है और लोग इसे भी बतौर रोजगार अपना रहे हैं तो दूसरा पक्ष भी कि कई लोग अपने पेट की आग को मिटाने के लिए भीख मांगने पर विवश हैं।
यह ऐसे लोग हैं कि उन्हें जहां भी कुछ दान में मिलने की आस होती है पहुंच जाते हैं। इनमें ज्यादातर बच्चे एवं महिलाएं हैं। देव दीपावली पर जहां लोग घाटों, मन्दिरों एवं अपने घरों में रोशनी कर पर्व मनाएंगे वहीं इनकी जिन्दगी में अंधेरे का अंधेरा ही रहेगा। इन भिखारियों के तन पर न तो ढंग से कपड़ा है और ही उनके ढहरने की कोई जगह। इन भिखारियों के खाने का कोई ठिकाना भी नहीं है उन्हें तो दिन भर किसी ऐसे व्यक्ति का इंतजार रहता है जो उन्हें खाने की एक रोटी दे दे। इस ठण्ड में भी ये दो दिन तक घाटों पर डटे रहेंगे क्योंकि भिक्षा में मिले अनाज, कपडों एवं नकदी से एक दो हफ्ते तक तो गुजारा हो ही जाएगा।












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