Exclusive: 4 दिन से थाने बंद है शारीरिक शोषण की शिकार युवती

वनइंडिया को हुसैनगंज थाने के गौरा चुरियारा गांव की अनुसूचित वर्गीय पूनम (काल्पनिक) ने फोन पर बताया कि उसने मीना सराय हार गांव के रहने वाले अजय मौर्या पर शादी करने का झांसा देकर एक साल तक शारीरिक शोशण करने और गर्भवती होने पर कोल्ड ड्रिंक के साथ जहर पिलाकर मारने के प्रयास से संदर्भित तहरीर पांच नवम्बर को पुलिस अधीक्शक राजेन्द्र सिंह को सौंपी थी। जिसकी जांच पुलिस क्षेत्राधिकारी सिटी गौरव सिंह को सौंपी गई।
उसने बताया कि सीओ साहब उसे जांच के नाम पर 21 नवंबर से फतेहपुर शहर के महिला थाने में बंद किए हैं। न तो अब तक मुकदमा दर्ज किया गया और न ही चिकित्सीय परीक्शण ही कराया गया। उसने बताया कि ‘वह चार दिन से नहा-धो तक नहीं पाई, क्योंकि पुलिस घर से कपड़े तक लाने नहीं जा पा रही।
जब अदालत बना सीओ कार्यालय
इस मामले में सबसे दुःखद पहलू यह रहा कि देश के नियम कानून के विपरीत बिना प्रथम सूचना रिपोर्ट अंकित किए ही पुलिस क्शेत्राधिकारी गौरव सिंह ने दो दिन से पीडि़ता और अभियुक्त पक्ष का न सिर्फ बयान दर्ज कर रहे, बल्कि मामले से जुड़े सबूत भी मांग रहे हैं। जबकि तल्ख सच्चाई यह है कि बिना अभियोग दर्ज किए पुलिस को किसी भी मामले की जांच करने का वैधानिक अधिकार नहीं है। सरकार द्वारा जारी सिटीजन चार्टर और मानवाधिकार आयोग के अलावा सर्वोच्च न्यायालय ने भी बिना कारण बताए किसी को गिरफ्तार करने पर रोंक लगए हुए है, जब किसी महिला को सिर्फ तहरीर देने में हिरासत में लेना अति गंभीर मामला है।
कोतवाली पुलिस नहीं लिख रही मुकदमाः सीओ
पुलिस क्षेत्राधिकारी सिटी गौरव सिंह ने बताया कि ‘मामले की जांच कर ली गई है, युवती और अजय मौर्या के बीच सहमत से शारीरिक संबंध बने है। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, घटना के समय पीडि़ता नाबालिग थी। मैंने मामले को गंभीरता से जांच परख कर शुक्रवार को ही नगर कोतवाली पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं, मगर नगर पुलिस मुकदमा नहीं दर्ज कर रही है।' उन्होंने बताया कि ‘युवती को उसके गांव में जान का खतरा है, इसलिए वह अपनी मर्जी से महिला थाने में रुकी हुई है।
पुलिस ने सवाल पूंछ कर जलील कियाः पीड़िता
पीड़िता युवती ने आरोप लगाया कि मुकदमा लिखे जाने के बहाने शुक्रवार को दिनभर कोतवाली में बैठाए रहे और कई पुरुष पुलिस कर्मी घटना जुड़े सवाल पूंछकर जलील करते रहे। उसने बताया कि एक पुलिस कर्मी ने तो यहां तक कह दिया कि पहले तो खूब मजा आया होगा, अब पुलिस को हलाकान करने चली आई। उसने बताया कि कोतवाली पुलिस दिनभर सुलह समझौते का दबाव डालती रही, न मानने पर फिर महिला थाने में लाकर बंद कर दिया गया है। यहां बता दें कि महिला उत्पीड़न के मामले में सर्वोच्च अदालत और मानवाधिकार आयोग कई कड़े आदेश जारी किए हैं, लेकिन इस मामले में फतेहपुर पुलिस हदें पार कर रही है।
बांदा पुलिस की गलती दोहरा रही फतेहपुर पुलिस
बांदा पुलिस ने भी दो साल पहले ठीक इसी तरह की गलती की थी, जब बहुजन समाज पार्टी के नरैनी विधायक रहे पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के अतर्रा आवास में गैंग रेप की शिकार शहबाजपुर गांव की एक किशोरी को चोरी के झूठे इल्जाम में जेल भेज दिया और बाद में सीबीआई जांच में कई पुलिस व जेल अधिकारी नप गए। आरोपी पूर्व विधायक अब भी जेल में हैं।
युवती को महिला थाने में रखने की जानकारी नहीं: एसपी
पुलिस अधीक्शक राजेन्द्र सिंह से जब युवती को बेकसूर महिला थाने में बंद करने के बारे में वनइंडिया ने पूंछा तो उनका कहना था कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। जबकि युवती ने बताया कि वह लगातार जरिए फोन पुलिस अधिकारियों के संपर्क में हैं, यहां तक कि उसने शनिवार को प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एसी शर्मा के सरकारी मोबाइल- 09454402509 में फोन कर सूचित किया है। बकौल पीड़िता डीजीपी ने अपना फैक्स नम्बर देकर मामले का फैक्स मांगा है, लेकिन पुलिस फैक्स नहीं करने दे रही।












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