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एफडीआई पर खुली बहस का आग्रह

An appeal to hold debate on FDI in retail
नई दिल्‍ली। भारत के रिटेल व्यापार में एफडीआई को अनुमति देने का मुद्दा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जिसके प्रत्येक नागरिक पर दूरगामी प्रभाव होंगे। सरकार हर तरह से अपने इस फैसले को जायज़ ठहराते हुए कह रही है कि अब देश की सभी समस्याओं का हल केवल इसी से होगा। प्रधानमंत्री, यूपीए अध्यक्षा सोनिया गाँधी, कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी और कांग्रेस के अंदर विभिन्न नेता रिटेल व्यापार में एफ.डी.आई के फायदे गिनाते हुए थकते नहीं हैं।

यह बात और है कि इस मामले में अपने दावों के समर्थन देने के लिए अभी तक वो कोई मजबूत तर्क दे नहीं पाए हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि इस नीति को लागू करने से पहले सरकार ने भी इस नीति के कारण विभिन्न वर्गो पर पड़ने वाले प्रभावो का गहराई से अध्यन्न ही नहीं किया।

दूसरी तरफ बहुमत की संख्या में देश के सभी राजनैतिक दल और रिटेल व्यापार से जूडे़ सभी वर्गों के प्रबल विरोध की अनदेखी सरकार ने की है। हालांकि सरकार अपने सभी साधनों द्वारा सही या गलत तर्को को रखने की कोशिश कर रही है। वहीं दूसरी ओर राजनैतिक दलों और स्टेक होल्डरों के मजबूत तर्क सही परिपेक्ष्य में नहीं रखे जा सके है।

इन हालातो के मद्देनज़र कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने एक विशिष्ट कदम उठाते हुए देश के मीडिया से अपील की है कि देश के बडे़ हित में मीडिया इस मुद्दे पर "समग्र खुली बहस" एक निश्चित कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित करें जिसमें दोनो पक्षों को बुलाएं और उन्हें इस मामले पर अपना पक्ष सभी तथ्यों एवं आंकड़ों के आधार पर रखने के लिए आमंत्रित करें जिससे इस विवादस्पद मुद्दे की सही तस्वीर देश के सामने आ सके। कन्फेडरेशन ने यह भी सुझाया है कि इस प्रकार की खुली बहस पूर्ण रूप से निश्पक्षता से हो इसलिए कुछ निश्पक्ष विशिष्ट नागरिकों का पैनल बनाया जा सकता है जो खुली बहस पर नज़र रख सके।

कन्फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी.भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खण्डेलवाल ने आज यहाँ जारी एक संयुक्त वक्तव्य में मीडिया से यह अपील करते हुए बताया कि इस प्रस्ताव का लेकर कन्फेडरेशन सभी प्रकार के मीडिया को अधिकारिक तौर पर पत्र भेजकर खुली बहस करवाने का आग्रह कर रहा है जिससे इस विषय की सच्चाई देश के आखिरी आदमी तक पहुँच सके और लोग निर्णय कर सकें की रिटेल व्यापार में एफ.डी.आई देश के लिए लाभदायक है अथवा नुकसानदायक है।

सरकार की यह नीति जो देश के 120 करोड़ लोगो की कीम़त पर देश के लगभग 150 कारपोरेट घरानों को लाभ देने के लिए लागू की गई है, का जनता द्वारा विशलेषण किया जाना आवश्यक है। लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका को बेहद अहम बताते हुए श्री भरतिया एवं श्री खण्डेलवाल ने अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति थोमस जैफर्सन के एक कथन का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा कि "यदि मुझसे पूछा जाए की समाचार पत्रों के बिना सरकार हो या सरकार के बिना समाचार पत्र हो तो मे बिना हिचक के दूसरे विकल्प को ही चुनूगां"।

व्यापारी नेताओं ने कहा कि मीडिया की यह जिम्मेदारी भी है कि वो आम आदमी से जूडे़ प्रत्येक मुद्दे को सही एवं समग्र परिपेक्ष्य में लोगों के सामने प्रस्तुत करें क्योंकि लोकतंत्र केवल सरकार बनाना ही नहीं बल्कि जीवन जीने की भी एक पद्दति है जिसमें किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर जनता की राय जानना बेहद जरूरी है। सरकार पर जनता का अंकुश बना रहे इस हेतू जनता के इर्द-गिर्द घूमने वाले मामलों को सीधे जनता तक पहुँचना भी जरूरी है। भारत जैसे देश में जहाँ नीतियां बनाने में जनता कतई सहभागी नहीं होती है ऐसे में जनमत जागरण करने का काम मीडिया बखूबी कर सकती है। मीडिया के माध्यम से जनता जान सकती है कि सच क्या है।

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