वाड्रा-डीएलएफ सौदे को मिली क्लीनचिट

आनन-फानन में यह रिपोर्ट तैयार करने और उसे शासन को भेजने पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। चकबंदी महानिदेशक का पदभार छोडऩे से पहले वरिष्ठ आइएएस अधिकारी अशोक खेमका ने इस दाखिल खारिज को रद करते हुए कहा था कि जिस अधिकारी ने यह निर्णय लिया उसे इसका अधिकार ही नहीं था। उन्होंने इसकी जांच के आदेश भी दिए थे, जिस पर बुधवार को गुड़गांव के जिला उपायुक्त ने रिपोर्ट भेजी है। खेमका के आदेश के तहत फरीदाबाद व पलवल जिले के कलेक्टरों ने सभी संबंधित तहसीलदारों से रॉबर्ट वाड्रा की जमीन का रिकॉर्ड तलब किया है।
खेमका ने 12 अक्टूबर को रॉबर्ट वाड्रा की गुड़गांव, फरीदाबाद, पलवल व मेवात जिलों में जमीन की जांच के आदेश दिए थे। फरीदाबाद व पलवल के जिला कलेक्टरों ने बताया कि चकबंदी विभाग से उनके पास आदेश बुधवार को ही आए हैं। उन्होंने वाड्रा की जमीन का रिकार्ड मांगा है। वाड्रा की कंपनी द्वारा मेवात जिले में खरीदी गई जमीन के सौदे की जांच के लिए बुधवार शाम तक मेवात के उपायुक्त वजीर सिंह गोयत को आदेश नहीं मिला था। उन्होंने उम्मीद जताई कि आदेश की प्रति उन्हें गुरुवार को मिल जाएगी।
केजरीवाल के सीनियर हैं खेमका
अशोक खेमका इंडिया अगेंस्ट करप्शन के नेता अरविंद केजरीवाल के सीनियर रहे हैं। अरविंद केजरीवाल मूल रूप से हरियाणा के हिसार के रहने वाले हैं जबकि अशोक खेमका रहने वाले भले ही पश्चिमी बंगाल के हैं लेकिन वह हरियाणा कैडर के ही आइएएस अधिकारी हैं। केजरीवाल और खेमका दोनों ही आइआइटी, खडग़पुर के विद्यार्थी रहे हैं। दोनों ने वहां से बीटेक किया है।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहिम चला रहे केजरीवाल और खेमका की पढ़ाई में एक साल का अंतर था। खेमका उनके सीनियर हैं। 30 अप्रैल, 1965 को बंगाल में जन्मे खेमका ने 1988 में आइआइटी खडग़पुर से बीटेक किया है। इसके अलावा वे एमबीए और कंप्यूटर साइंस में पीएचडी हैं। केजरीवाल ने आइआइटी खडग़पुर से 1989 में बीटेक किया है। दोनों के मुद्दे और मुहिम एक जैसी होने का ही नतीजा है कि अरविंद केजरीवाल ने खेमका के तबादले पर राज्य सरकार से पूछा है कि वह अपनी स्थानांतरण नीति को स्पष्ट करे। क्या वाड्रा के खिलाफ जांच का आदेश देने पर खेमका का तबादला किया गया।












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