माया या अखिलेश: कानून किसकी जेब में, फैसला आपके हाथ

डे-लाइट मर्डर और लूट की वारदातें आम हो चुकी हैं। इन सबके बावजूद भी सरकार सिर्फ सफाई देती है कार्रवाई कभी नहीं होती। आपको बता दें कि यूपी में इस साल अगस्त तक 2734 हत्याएं, 1134 बलात्कार, 1812 सरेआम लूट, 483 डकैती और 2680 अपहरण जैसी संगीन वारदातें हो चुकी हैं जबकि 2011 में यानी कि मायावती के राज में हत्या का आंकड़ा 1014, अपहरण 18, बलात्कार 18, लूट 483 और डकैती 52 था। अब युवा अखिलेश इस गंभीरता को समझने के बजाय पिछली सरकार पर दोष मढ़ते हैं। अखिलेश का कहना है कि पुलिस महकमा बहुत बिगड़ा हुआ है, उसे सुधारने में समय लगेगा। लगातार हम लोग इस दिशा में काम कर रहे हैं। कानून व्यवस्था हमारी जिम्मेदारी है, जो भी दोषी अधिकारी होंगे उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
अखिलेश के इस रवैये के बाद से अब लोगों को लगने लगा है कि अखिलेश को युवा समझकर कहीं बच्चे की हाथ में तो नहीं चली गई है यूपी की कमान। अंतर यहीं देख लीजिए माया सरकार में नेताओं और मंत्रियों पर भी फौरन कार्रवाई होती थी। ऐसा लिखने के पीछे हमारा यह उद्देश्य नहीं है कि हम किसी सरकार के पक्षधर है, हां यह जरूर है कि सूबे के रहने वाले समय-समय पर यह सोचते रहें कि क्या हो रहा है और क्या होता था या फिर आगे उन्हें क्या करना है? तो आईए यहां एक बानगी पेश करते हैं दोनों सरकारों (मायावती और अखिलेश यादव) की जिसे पढ़ने के बाद आप खुद ही तय कर लीजिएगा कि कौन बेहतर है या फिर भविष्य में कौन होगा?
मायावती का शासनकाल
1. मायावती राज में सांसद उमाकांत यादव को मायावती ने अपने घर बुलाया और फिर पुलिस को सूचना देकर खुद गिरफ्तार करवा दिया। उमाकांत पर दबंगई, जबरन जमीन कब्जा और धन उगाही का आरोप था। आरोप लगने के 24 घंटे के भीतर-भीतर यह कार्रवाई की गई।
2. औरैया में इंजीनियर मनोज गुप्ता को चंदा मांगने के लिये PWD मंत्री शेखर तिवारी ने पिटाई कर दी। इसके बाद मनोज गुप्ता की मौत हो गई। महज 8 घंटे के अंदर विधायक को गिरफ्तार किया गया और जेल भेज दिया गया।
3. फैजाबाद विश्वविद्यालय कर दलित छात्रा शशिराज रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई। छात्रा के पिता ने इस संबंध में मुख्यमंत्री मायावती से शिकायत की और मंत्री आनंद सेन पर किडनैपिंग का आरोप लगाया। परिणाम सामने है। आनंद सेन को मंत्री पद से हटा दिया गया और आज जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे हैं।
4. मत्स्य विकास राज्य मंत्री यमुना निशाद को थाने में फायरिंग और फायरिंग में सिपाही की मौत के मामले में मायावती ने निशाद को अपने घर बुलाकर गिरफ्तार करवा दिया।
5. बांदा विधायक पुरुषोत्तम द्विवेदी को दलित नाबालिग लड़की से सामुहिक बलात्कार करने के आरोप में पहले पार्टी से बेदखल किया गया और फिर जेल भेज दिया गया।
6. बुलंदशहर के विधायक गुड्डू पंडि़त पर यौन शोषण और बलात्कार का आरोप लगा। उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
7. इसके अलावा मायावती ने अपने 12 मंत्रियों को लोकायुक्त की शिकायत पर मंत्री पद से हटाया और टिकट भी नहीं दिया।
ऐसा नहीं है कि मायावती ने यह सबकुछ मामले को खुद संज्ञान में लेते हुए किया। मामला मीडिया में तुल पकड़ा तो माया के कान खड़े हुए और उन्होंने ऐसा किया। बात यह है कि कार्रवाईयां की गईं।
युवा अखिलेश का शासनकाल
1. बीते 8 अक्टूबर को गोंडा में मंत्री विनोद सिंह उर्फ पंडि़त सिंह ने सीएमओ को धमकाया और उन्हें अगवा कर ले गये और जबरन बहाली की लिस्ट बनवाई। सीएमओं को लापता हुए आज चार दिन होने वाले हैं मगर उनका कुछ पता नहीं है। ध्यान देने वाली बात यह है कि ना तो अभी कोई मुकदमा दर्ज किया गया है और ना ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस संबंध में बयान जारी किया है। हालांकि मीडिया में छीछालेदर होने के बाद घटना के तीन दिन बाद आज मंत्री जी ने खुद इस्तीफा सौंपा है।
2. 8 अक्टूबर को ही औरैया जिले के सपा विधायक मदन सिंह गौतम पर एक महिला ने बंधक बनाने और चार महीने तक बलात्कार करने का संगीन आरोप लगाया है। मदन सिंह खुली हवा में सांस ले रहे हैं। अखिलेश ने इस संबंध में भी कोई ठोस कार्रवाई करने के आदेश नहीं दिये हैं।
3. 23 अप्रैल को बदायूं में एसपी विधायक आबिद रजा और उनके आधा दर्जन गुर्गों पर एक शख्स से जबरन जमीन लिखवाने का मामला दर्ज कराया।
4. 26 मार्च को झांसी के बीडीओ पर समाजवादी पार्टी नेता भरत सिंह ने सिर्फ इसलिए गोली चलाई क्योंकि बीडीओ ने भरत सिंह पर चुनाव में गड़बड़ी फैलाने की रिपोर्ट दर्ज की थी। इसके अलावा इलाहाबाद के प्रतापगढ़ में एसपी विधायक महेश नारायण सिंह, नागेन्द्र सिंह ने दो अलग अलग दरोगाओं को धमकी दी।
इन सभी मामलों में अबतक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। चौकाने वाली बात यह है कि कानून व्यवस्था को दर किनार करते हुए समाजवादी पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों से लेकर विधायकों और मंत्रियों तक के करीबन 22 हजार से भी ज्यादा मुकदमे वापस लेने का फैसला किया है। अब इस संबंध में आपकी क्या राय है आप नीचे लिखे कमेंट बॉक्स में दर्ज करा सकते हैं। हमे आपके प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा क्योंकि आप ही है वो जो अपने हक का इस्तमाल कर राज्य के सबसे महत्वपूर्ण कुर्सी पर जिसे चाहें उसे भेज सकते हैं।












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