PICS: देखें भारतीय वायुसेना के 20 लड़ाकू विमान
बेंगलूरु। हम आपको रू-ब-रू करायेंगे भारतीय वायुसेना के उन लड़ाकू विमानों से जो हमारी रक्षा के लिये देश के अलग-अलग स्थानों पर तैनात हैं। उन विमानों के बारे में बतायेंगे, जो हमारे लड़ाकों को युद्धस्थल तक पहुंचाते हैं और उन हेलीकॉप्टरों के बारे में जो विभिन्न कार्यों के लिये वायुसेना में इस्तेमाल किये जाते हैं।
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हमारा यह लेख इसलिये भी विशेष है, क्योंकि अब तक आप भारतीय वायुसेना के विमानों के अंग्रेजी नामों से वाकिफ होंगे जैसे जैगुवार, मिग-21, आदि। हम आपको वो नाम बतायेंगे, जो भारतीय वायुसेना ने इन विमानों को दिये हैं।
विमानों/हेलीकॉप्टरों के बारे में संक्षिप्त जानकारी और भारतीय नाम जानने के लिये सामने बॉक्स में टेक्स्ट जरूर पढ़ें-

सुखोई एसयू-30 एमकेआई
यह विमान भारतीय वायुसेना का सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान है। यह विमान सीधे निशाने पर वार करता है। कुल 272 सुखोई विमान रूस से आयात किये गये हैं। भारत ने 272 सुखोई विमान ऑर्डर किये, जिनमें से 2011 तक 146 विमान सेना के बेड़े में शामिल हो चुके हैं। यह विमान टाईटेनियम धातु का बना होता है और इसमें पायलट रडार के माध्यम से पहले से लक्ष्य का निर्धारित कर सकता है।

मिग-29 मिकोयान/ बाज़
यह विमान सुखोई के बाद सबसे शक्तिशाली माना जाता है। इसका नाम बाज़ भी है। इस समय वायुसेना के पास कुल 68 मिग-29 विमान हैं और उनमें से कई को अपग्रेड भी किया गया है। यह भी रूस से आयात किया गया है। बिना अतिरिक्त टैंक के यह विमान 1500 किलोमीटर तक जा सकता है, जबकि अतिरिक्त टैंक लगाने पर 2100 किलोमीटर तक।

वज्र या मिराज 2000
इस विमान को वज्र नाम दिया गया। यह आईएएफ का प्राइमरी फाइटर प्लेन है। इस समय भारतीय सेना के पास 51 मिराज विमान हैं। वैसे अब इसका अपग्रेड विमान मिराज 2000-5 तक आ गया है।

मिग-21 या मिकोयान गुरेविक
भारतीय वायुसेना के पास इस यमय 125 मिग-21 विमान हैं। हाल ही में इस विमान में तकनीकी गड़बडि़यों के शिकायतें मिलने लगीं और मिग-21 के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबरें ज्यादा आने लगी। लिहाजा विमान बनाने वाली भारतीय इकाई एचएएल अब इसकी जगह नया विमान बना रही है, जिसका नाम होगा तेजस। हालांकि तेजस नाम के हेलीकॉप्टर पहले ही बन चुके हैं।

सतलज अथवा एंटोनोव
यह मध्यम दर्जे का ट्रांसपोर्ट विमान है। जब कभी जरूरत पड़ती है तो सैनिकों को पैराशूट से उतारने या बम गिराने के लिये इसका इस्तेमाल किया जाता है।

शमशेर अथवा जैगुवार
भारतीय वायुसेना में जब जैगुवार आया तो का नाम शमशेर रखा गया। यह धरती पर कहीं भी हमला करने के लिये इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत में इस समय कुल 139 शमशेर यानी जैगुवार हैं।

एयरबोर्न वॉर्निंग एयरक्राफ्ट
यह टोही विमान है, जिसका इस्तेमाल दुश्मन जहाजों की स्थिति का पता लगाने के लिये किया जाता है। इस विमान में हाई फ्रीक्वेंसी वाले रडार लगे होते हैं, जो एक क्षण में दुश्मन जहाज के बारे में बता देते हैं। भारत के पास फिलहाल 3 टोही विमान हैं। हालांकि डीआरडीओ इस पर काम कर रही है, जल्द ही भारत के पास खुद के टोही विमान होंगे।

टैंकर विमान
इस विमान का इस्तेमाल अन्य विमानों में ईंधन भरने के लिये किया जाता है। इससे सीधे उड़ते विमान में ईंधन भरा जा सकता है।

एचएएल तेजस
एचएएल तेजस लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर हैं, जो सैनिकों को विभिन्न प्रकार की मदद पहुंचाने के लिये इस्तेमाल किये जाते हैं।

एचएएल एजजेटी-36 अथवा
नाम के इस हेलीकॉप्टन का निर्माण खुद भारत के एचएएल और डीआरडीओ ने किये हैं। आईएएफ में तेजस के बाद इस हेलीकॉप्टर को महत्व दिया जाता है।

एएन-32
मिराज 2000 के साथ-साथ भारत ने पांच एएन 32 विमान भी खरीदे।

गजराज अथवा ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट
इस एयरक्राफ्ट्र में भारतीय थल, जल अथवा वायुसेना के सैनिकों को मौके पर शस्त्रों के साथ भेजने का काम किया जाता है। इसका आकार काफी बड़ा होता है और इसमें पूरी की पूरी बटालियन आ जाती है। इसलिये इसका नाम गजराज रखा गया। तमाम मिलिटरी उपकरणों को इस विमान में रखकर भेजने का काम किया जाता है।

मरुत
जर्मन तकनीक का इस्तेमाल करते हुए एचएएल ने ये विमान खुद बनाये।

दीपक अथवा ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट
इस विमान का इस्तेमाल एयरफोर्स में ट्रेनिंग के लिये दिया जाता है। इसका नाम दीपक है। इसमें हमला करने की तकनीकियों के अलावा पैराशूट रिकवरी सिस्टम से लेकर बहुत कुछ है।

सूर्य किरन
सूर्य किकरन का इस्तेमाल एरोबेटिक्स यानी करतब दिखाने के लिये किया जाता है। ये विमान खास तौर से इसी काम के लिये बनाये जाते हैं। हर साल वायुसेना दिवस और गणतंत्र दिवस पर आसमान में जो करतब देखते हैं वो सूर्य किरन विमान से ही किये जाते हैं।

सारंग
सारंग भारतीय वायुसेना का वो हेलीकॉप्टर है जिसका इस्तेमाल घनी पहाडि़यों के बीच जाने के लिये किया जाता है। इसे 2003 में सेना में शामिल किया गया था।

एमआई-17
एमआई-17 अत्याधुनिक तकनीक से लैस हेलीकॉप्टर होते हैं, जिनका इस्तेमाल किसी भी मौसम में किया जा सकता है। सेना में जल्द ही 58 एमआई-17 हेलीकॉप्टर शामिल होंगे।

एमआई-8
ये हेलीकॉप्टर अब ज्यादा इस्तेमाल नहीं होते हैं। इन्हीं की जगह एमआई 17 लाये जा रहे हैं।

एमआई-35 हिंद अकबर
इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल हमले के लिये किया जा सकता है। साथ ही छोटी टुकडि़यों को ले जाने में भी इसका इस्तेमाल होता है।

एचएएल ध्रुव
ये हलके हेलीकॉप्टर हैं, जो साधारण ट्रांसपोर्ट व यूटिलिटी हेलीकॉप्टर के रूप में इस्तेमाल होते हैं। इनका निर्माण भी एचएएल में ही किया गया है।












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