पार्टी बनाने का आईडिया अन्ना का था: केजरीवाल

केजरीवाल ने राष्ट्रीय पत्रिका तहलका को दिये गये एक साक्षात्कार में कहा कि कि पार्टी बनाने की पहल अन्ना ने की, लेकिन अब पीछे हट गये। मैं यह नहीं कहूंगा कि अन्ना ने धोखा दिया। वो एक महान हस्ती हैं। उन्होंने अपना इरादा क्यों बदल दिया, यह मैं नहीं जानता। केजरीवाल ने कहा, "मैंने अन्ना से जब पूछा आप पहले तो कुछ कह रहे थे, अब कुछ और तो उन्होंने जवाब दिया मैं अब जो कह रहा हूं मैं वही करूंगा, यह तुम पर है कि तुम्हें क्या करना है।"
केजरीवाल ने आगे कहा, "मैंने कहा था कि अगर अन्ना नहीं चाहेंगे तो मैं राजनीतिक पार्टी नहीं बनाउंगा। लेकिन अब मुझे लगता है कि उन्हें मुझपर विश्वास नहीं। उस समय जब राजनीतिक विकल्प की बात निकली थी, तो वो उनके दिल से निकली थी। वैसे भी अब मेरे पास और कोई विकल्प नहीं बचा है। मैं यह सोचता हूं कि अगले 5-6 साल बाद देश में कुछ बचेगा भी या नहीं। जिस तरह से देश में लूट-खसोट चल रही है, उससे तो लगता है कि देश आगे बढ़ ही नहीं पायेगा।"
केजरीवाल से जब यह पूछा गया कि उनका राजनीति में आने का मकसद क्या है, तो जवाब मिला, "लोग पावर से पैसा और पैसे से पावर खरीदने आते हैं। अगर मुझे पैसा कमाने का इतना ही शौक होता तो इंकम टैक्स की नौकरी मेरे लिये बुरी नहीं थी। आईटी कमिश्नर एक एमपी से ज्यादा पैसा कमा सकता है। अगर मुझे पावर में आने का शौक होता तो आईटी कमिश्नर की पावर कम नहीं होती है। सितंबर 2010 में मैंने जो लोकपाल बिल का ड्राफ्ट तैयार किया है मैं उसे लाना चाहता हूं।"












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