अन्‍ना हजारे की नकल करते हैं बाबा रामदेव!

दिल्‍ली के रामलीला मैदान पर बोरिया बिस्‍तर बिछा कर आंदोलन कर रहे बाबा रामदेव क्‍या कुछ अलग कर रहे हैं? इसका सवाल खुद बाबा रामदेव के पास नहीं है, क्‍योंकि जब-जब मीडिया ने उनसे पूछा तब-तब उन्‍होंने कहा समय आने पर वो अपना पिटारा खोलेंगे। यही कारण है कि मीडिया ने भी आंदोलन से मुंह फेरना बंद कर दिया है। मीडिया भी ऐसा क्‍यों न करे, उसे हर पल जो एक्‍सक्‍लूसिव जो चाहिये होता है। रही बात बाबा रामदेव की तो एक्‍सक्‍लूसिव तो दूर की बात वो ज्‍यादातर मामलों में अन्‍ना हजारे की नकल कर रहे हैं।

हमें पता है कि बाबा रामदेव के अनुयायियों को यह लेख पढ़कर अच्‍छा नहीं लगेगा, लेकिन हम जो लिख रहे हैं असल में यथार्थ वही है। अगर बाबा के आंदोलन की शुरुआत देखें तो अन्‍ना जिस तरह जंतर-मंतर पर पहुंचने से पहले राजघाट जाकर शहीदों को नमन करते हैं, उसी प्रकार बाबा रामदेव शहीद पार्क पहुंचे और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मंच पर पहुंचते ही अन्‍ना जिस टोन और हुंकार के साथ भारत माता की जय कहते हैं, ठीक उसी प्रकार बाबा भी। खैर इसमें कोई बुराई नहीं है।

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वहीं अगर भाषण की बात करें तो लोकपाल बिल की डिमांड करते वक्‍त अन्‍ना ने जंतर-मंतर से कहा, पीयोन से पीएमओ तक भ्रष्‍टाचार व्‍याप्‍त है, ठीक यही शब्‍द बाबा ने रामलीला मैदान में इस्‍तेमाल किये। अन्‍ना ने पूरे देश से आह्वान किया कि सभी लोग जहां हैं वहीं बैठकर अनशन करें। वहीं बाबा ने कहा सभी लोग अपने-अपने घरों से उनके आंदोलन में शरीक हों।

सीबीआई को स्‍वतंत्र इकाई बनाने और सिटीजन चार्टर लागू करने की बात आती है, तो दोनों के तर्क सुनने पर आपको साफ लगेगा कि दोनो के भाषण एक ही डायरी से पढ़े जा रहे हैं। अन्‍ना ने कहा- सरकार सीबीआई का इस्‍तेमाल कर रही है, वही बात बाबा ने कही। अन्‍ना ने कहा जन्‍म प्रमाण पत्र से लेकर मृत्‍यु प्रमाण पत्र तक बनवाने में घूसखोरी होती है, तो यही बात बाबा ने भी दोहरायी।

हां यह जरूर है कि बाबा रामदेव ने लोकपाल और काले धन से इतर जाकर देश के कई अन्‍य मुद्दे भी उठाये हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि कुछ भी अलग न करके बाबा अपना आंदोलन सफल कैसे बनायेंगे? यह सवाल इसलिये जायज है, क्‍योंकि देश की जनता उनकी तरफ आस भरी निगाहों से देख रही है। देश की जनता को विश्‍वास है कि बाबा रामदेव और अन्‍ना हजारे एक बड़ा परिवर्तन लेकर आयेंगे, लेकिन रोज मंच पर खड़े होकर एक घंटा भाषण देने से क्‍या देश बदल जायेगा?

इस सवाल का उत्‍तर अन्‍ना हजारे को मिल गया और उन्‍होंने अपनी टीम भंग कर दी और राजनीति में उतरने का फैसला कर डाला। अब सवाल यह उठता है कि बाबा को उसका उत्‍तर कब मिलेगा? क्‍या बाबा रामदेव राजनीति में आयेंगे, क्‍या बाबा अपनी पार्टी बनायेंगे?

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