सुशील कुमार शिंदे- सब इंस्‍पेक्‍टर से गृहमंत्री तक का सफर

Sushil Kumar Shinde takes over as home minister from Chidambaram
नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। इसे संयोग कहें या फिर राजनीति की विसात क्‍योंकि जिस समय आधा भारत अंधेरे में डूबा था उस समय उर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे का राजनीतिक करियर रौशन हो रहा था। जी हां शिंदे पी चिदंबरम की जगह नये गृह मंत्री बन गये हैं। चिदंबरम को वित्‍त मंत्री बनाया गया है। इसे लोकतंत्र का चमत्‍कार नहीं तो और क्‍या कहेंगे कि महाराष्‍ट्र में एक मामूली सब इंस्‍पेक्‍टर से अपना करियर शुरु करने वाले शिंदे दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के गृह मंत्री जैसा अहम पद संभाल रहे हैं। मालूम हो कि इससे पहले यह पद चिदंबरम संभाल रहे थे। चिदंबरम को मंत्रिमंडल में सबसे योग्‍य मंत्रियों में गिना जाता है तो जाहिर है कि अब शिंदे की भी तुलना चिदंबरम से की जायेगी। तो आईए आज सुशील कुमार शिंदे के राजनीतिक सफर पर चर्चा करते हैं।

शिंदे का सब इंस्‍पेक्‍टर से गृह मंत्री बनने तक का राजनीतिक सफर

सुशील कुमार को मंत्रिमंडल में एक कुशल राजनीतिज्ञ माना जाता है। अपनी शालीनता के लिये जाने जानेवाले शिंदे महाराष्‍ट्र के पहले द‍लित मुख्‍यमंत्री रह चुके हैं। राजनीति में आने की बात करें तो कृषि मंत्री शरद पवार से प्रभावित होकर शिंदे ने 1971 में पुलिस की नौकरी छोड़ दी थी और राजनीति में आ गये थे। 1974 में वह पहली बार महाराष्‍ट्र के विधानसभा में पहुंचे और उसी साल सरकार में उन्‍हें मंत्री का पद मिल गया। सुशील कुमार शिंदे का राजनीतिक सफर परवान चढ़ा और वह लागातार 5 बार विधानसभा के लिये चुने गये।

शिंदे 1992 में राज्यसभा के लिए चुने गए। 1999 में शिंदे के राजनीतिक करियर में एक नया मोड़ तब आया जब कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी 1992 में अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ रही थीं और उनके चुनाव प्रचार का जिम्मा शिंदे को सौंपा गया था। ऐसा माना जाता है कि शिंदे उसी दौरान सोनिया के करीब आए और तबसे गांधी परिवार के चहेते बन गये। शिंदे के लिए अब समय आ चुका था सक्रिय राजनीति से निकल कर राजभवन में बैठने का। साल 2004 में केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार बनने के बाद भी उन्हें राज्यपाल बनाया गया। शिंदे आंध्र प्रदेश के राज्यपाल बने। साल 2006 में शिंदे की एक बार फिर सक्रिय राजनीति में वापसी हुई और उन्हें मनमोहन मंत्रिमंडल में जगह मिली। ऊर्जा मंत्री के रूप में शिंदे का कामकाज साधारण ही माना जाता है, देखना होगा कि गृह मंत्री के रूप में शिंदे कोई छाप छोड़ पाते हैं नहीं।

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