सुशील कुमार शिंदे- सब इंस्पेक्टर से गृहमंत्री तक का सफर

शिंदे का सब इंस्पेक्टर से गृह मंत्री बनने तक का राजनीतिक सफर
सुशील कुमार को मंत्रिमंडल में एक कुशल राजनीतिज्ञ माना जाता है। अपनी शालीनता के लिये जाने जानेवाले शिंदे महाराष्ट्र के पहले दलित मुख्यमंत्री रह चुके हैं। राजनीति में आने की बात करें तो कृषि मंत्री शरद पवार से प्रभावित होकर शिंदे ने 1971 में पुलिस की नौकरी छोड़ दी थी और राजनीति में आ गये थे। 1974 में वह पहली बार महाराष्ट्र के विधानसभा में पहुंचे और उसी साल सरकार में उन्हें मंत्री का पद मिल गया। सुशील कुमार शिंदे का राजनीतिक सफर परवान चढ़ा और वह लागातार 5 बार विधानसभा के लिये चुने गये।
शिंदे 1992 में राज्यसभा के लिए चुने गए। 1999 में शिंदे के राजनीतिक करियर में एक नया मोड़ तब आया जब कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी 1992 में अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ रही थीं और उनके चुनाव प्रचार का जिम्मा शिंदे को सौंपा गया था। ऐसा माना जाता है कि शिंदे उसी दौरान सोनिया के करीब आए और तबसे गांधी परिवार के चहेते बन गये। शिंदे के लिए अब समय आ चुका था सक्रिय राजनीति से निकल कर राजभवन में बैठने का। साल 2004 में केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार बनने के बाद भी उन्हें राज्यपाल बनाया गया। शिंदे आंध्र प्रदेश के राज्यपाल बने। साल 2006 में शिंदे की एक बार फिर सक्रिय राजनीति में वापसी हुई और उन्हें मनमोहन मंत्रिमंडल में जगह मिली। ऊर्जा मंत्री के रूप में शिंदे का कामकाज साधारण ही माना जाता है, देखना होगा कि गृह मंत्री के रूप में शिंदे कोई छाप छोड़ पाते हैं नहीं।












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