वैबसाईट कर सकती है गुमशुदा बच्चों की खोज

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जसबीर सिंह ने उपरोक्त बात को चर्चा में रखते हुए कहा कि इस समस्या पर नियंत्रण करने और मानव तस्करी के पीडि़तों की स्थिति में सुधार लाने के लिए प्रशासन, पुलिस, प्राधिकरण और न्यायपालिका द्वारा संयुक्त प्रयास किए जाने चाहिए। हरियाणा और पंजाब सरकारों के सहयोग से रविवार को चंडीगढ ज्युडिशियल एकेडमी में हरियाणा, पंजाब और संघीय क्षेत्र चंडीगढ के राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण द्वारा मानव तस्करी पर चर्चा हुई।
न्यायमूर्ति जसबीर सिंह ने कहा कि हाल ही में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णय में पंजाब, हरियाणा और संघीय क्षेत्र चण्डीगढ में पुलिस के लिए शिशु गुम होने के बारे में किसी भी शिकायत की एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। इसके अतिरिक्त, गुमशुद्धा व्यक्ति की फोटो मीडिया में प्रकाशित करवाई जाए ताकि उसकी खोज की जा सके। उन्होंने मानव तस्करी की घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कि मनुष्य को एक वस्तु माना जा रहा है। हमारे इस समस्त विश्व में असंख्य कुपोषित बच्चे हैं। हमें मानव तस्करी को रोकना है और उसके कारणों का पता लगाना है।
इस चर्चा में भाग लेने वाले प्रतिभागियों और मुख्य अतिथियों का स्वागत करते हुए हरियाणा के न्यायिक प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव समीर माथुर ने कहा कि हम सब के लिए यह चिंता का विषय है और हमारे समाज से इस बुराई के उन्मूलन के लिए रचनात्मक प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने मानव तस्करी के कारणों पर बल देते हुए कहा कि मानव तस्करी पर यह चर्चा इस मामले के समाधान के लिए लाभप्रद होगी। इस अवसर पर बोलते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के जज एवं कार्यकारी अध्यक्ष, हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण न्यायमूर्ति सतीश कुमार मित्तल ने कहा कि मानव तस्करी विशेषकर महिलाओं और बच्चों के बारे में एक गम्भीर चिंता का विषय बन गया है। यह एक बड़े पैमाने पर संगठित अपराध बन गया है, जिसका समाधान किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों की तस्करी की घटनाएं बढ़ रही हैं और लगभग 60 प्रतिशत तस्करी से पीडि़त बच्चे 18 वर्ष से कम आयु के हैं।
न्यायमूर्ति मित्तल ने कहा कि लोगों में संवेदनशील क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए जागरूकता उत्पन्न की जानी चाहिए ताकि तस्करी की समस्या से निपटा जा सके। इसके अतिरिक्त, इस दिशा में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस अवसर पर बोलते हुए मुम्बई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सुश्री रोशन दलवी ने यौन उत्पीडऩ से सम्बन्धित कानूनों और मानव तस्करी के कारणों पर बल दिया।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयुक्त, अध्यक्ष, नई दिल्ली प्रो सांथा सिन्हा ने बाल श्रमिक सहित बेगार के लिए तस्करी के विभिन्न कानूनों और प्रक्रियाओं पर प्रकाश डाला। फैमली कोर्ट की जज सुश्री स्वाति चौहान ने यौन अपराधों के न्यायिक निर्णयों के विभिन्न कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनैतिक तस्करी उन्मूलन अधिनियम (आईटीपीए) मानव तस्करी से निपटने के लिए सर्वोत्तम कानून है।












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