क्यूं काल का ग्रास बन रहे हैं अमरनाथ यात्री?

जम्मू कश्मीर में बाबा बर्फानी की पवित्र यात्रा इन दिनों चल रही है। यात्रा श्रावण पूर्णिमा अर्थात रक्षाबंधन तक चलेगी। भोलेनाथ के कई हजार भक्त रोजाना प्राकृतिक हिमलिंग के दर्शन कर रहे हैं। अनुमान है कि देश-विदेश से हिमालय की इस कंदरा में अपने आराध्य के अनूठे रूप का दर्शन करने पंहुचने वालों की संख्या का आंकड़ा इस बार भी बीते बरस के आंकडे़ को पार कर जाएगा। और ऐसा तब होगा जबकि इस बार यात्रा श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड और उमर अब्दुल्ला नीत राज्य सरकार की जिद्द के कारण पिछले साल की तुलना में सात दिन कम चलेगी।
मगर श्रद्धा के इस सैलाब से जुड़ी एक बात सबको चिंता में डाले हुए है। बाबा के दर्शन की इच्छा से घरों से निकले कई लोग रोजाना काल का ग्रास बन रहे हैं। पवित्र गुफा तक के सफर में हृदयाघात या अन्य दिक्कतों के कारण यात्रियों के परलोक सिधारने की घटनाएं तो कोई नई बात नहीं है। नई और चिंता की बात यह है कि मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आधिकारिक सूचनाओं के अनुसार यात्रा के प्रारंभिक बीस दिनों में 82 यात्रियों की मौत हुई। इनमें से अधिकांश की मृत्यु हृदयाघात से हुई। स्थिति की नाजुकता और गंभीरता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस स्थिति का स्वतः संज्ञान लेते हुए श्राइन बोर्ड को नोटिस जारी कर इसकी वजह पूछी है।
श्राइन बोर्ड का दावा सभी इंतजाम अच्छे
यात्रा का प्रबंधन संभालने वाले श्राइन बोर्ड का दावा है कि यात्रा मार्ग को सुगम बनाने के लिए हर वर्ष पिछले सालों के मुकाबले बेहतर इंतजाम किए जाते है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इंतजाम बेहतर हो रहे हैं तो श्रद्धालुओं की मौत का आंकड़ा कम होकर शून्य की ओर जाने के बजाय उलटी दिशा में क्यूं बढ़ रहा है? जाहिर है कि इस सवाल का जवाब शासन-प्रशासन को देना होगा। इस प्रश्न का उत्तर बोर्ड के मुखिया के नाते महामहिम राज्यपाल एनएन वोहरा से भी मांगा जाना चाहिए और बात बात पर ट्विटियाने वाले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भी। बोर्ड की आधिकारिक विज्ञप्तियों में यात्रियों की मौत के सिलसिले पर एनएन वोहरा की चिंता प्रतिलक्षित हुई है। साथ ही बोर्ड के अधिकारी अपने इंतजामों के दमदार होने का दम भरते हुए अपना अप्रत्यक्ष बचाव करते देखे -सुने जा रहे हैं।
उधर, एक संतोष की बात यह है कि मुख्यमंत्री उमर की ऑनलाइल चिड़िया का मुंह इस मामले पर अब तक बंद है। कौन नहीं जानता कि यह चोंच खोलकर चूं-चपड़ करती है तो अक्सर अनर्गल प्रलाप ही करती है। जी हां, अपनी आपत्तिजनक ट्वीट्स के लिए कुख्यात मुख्यमंत्री उमर यह कह कर भी तो भक्तों की दुखती रग को जोर से दबा सकते थे कि जो लोग मर जा रहे हैं, उनके भगवान ही शायद उनको दर्शन नहीं देना चाहते थे। या वे यह भी फरमा सकते थे कि जो भगवान के घर की राह में मर रहे हैं वे तो सीधे वैतरणी तर रहे हैं,उनके लिए भला क्यूं परेशान हुआ जाए। बहुत दिन नहीं बीते जब उमर ने ट्विट्टर पर यह लिख कर सबको सकते में डाल दिया गया कि अमरनाथ यात्रा की अवधि वे या उनकी राज्य सरकार नहीं घटा रही। यह तो खुद आपके यानि यात्रियों के भगवान हैं जो नहीं चाहते कि आप अभी यात्रा शुरू करें।
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