सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फौज की कैप्टन लक्ष्मी सहगल का निधन

वह गत दो दिनों से चिकित्सालय के आईसीयू में कोमा में थीं और आज सुबह उन्होंने अन्तिम सांस ली। कैप्टन सहगल आजाद हिन्द फौज में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के साथ मिलकर देश की आजादी के लिए लड़ चुकी हैं।
देश की आजादी का एक और सिपाही सोमवार 23 जुलाई को देशवासियों को छोड़कर चला गया। यह सिपाही कोई और नहीं बल्कि कैप्टन लक्ष्मी सहगल थीं जो रानी लक्ष्मीबाई रेंजीमेंट में कर्नल थीं। नेताजी की सहयोगी कैप्टन सहगल के मरने से आजादी की लड़ाई का एक युग समाप्त हो गया।
उन्होंने 1934 में आजादी की लड़ाई में अपना सक्रिय योगदान दिया और कई मोर्चों पर अंग्रेजों के दांत खट्टे किए। आजादी का वीर सिपाही आज हमें छोड़कर चला गया।
कैप्टन सहगल एक सप्ताह से चिकित्सालय में भर्ती थीं उनकी हालात लगातार गंभीर बनी हुई थी। पहले आईसीयू, फिर वेन्टीलेटर पर और उसके बाद कोमा। चिकित्सालय में जाने के बाद कैप्टन सहगल की हालत में सुधार नहीं हुआ।
उनके साथ उनकी बेटी सुभाषिनी अली थीं जो उनकी देखभाल कर रहीं थीं। कैप्टन सहगल के मरने की सूचना उनकी बेटी ने दी। सुभाषिनी ने बताया कि उनकी मां का आज सवेरे निधन हो गया यह कहते हुए उनका गला भर और वह आगे कुछ नहीं कह सकीं। कैप्टन सहगल की मौत की खबर आते ही उनके चाहने वाले चिकित्सालय पहुंचने लगे। उधर कर्ई राजनीति हस्तियों ने भी उनके निधन पर दुख जताया।
ज्ञात हो कि कैप्टन सहगल ने 1997 में राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ा था और 1998 में उन्हें पदमविभूषण सम्मान भी मिला था। कैप्टन सहगल पेशे से चिकित्सक थी और सुभाष चन्द्र बोस की सहयोगी थीं तथा 1943 में आजाद हिंद सेना की रानी लक्ष्मी बाई रेजीमेंट में कर्नल थी। कैप्टन लक्ष्मी सहगल को 1998 में पद्मविभूषण सम्मान से भी नवाजा गया था।












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