हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देंगे अमरमणि त्रिपाठी

गौरतलब है कि सोमवार को पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को उत्तराखंड हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिल सकी। हाई कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी। आपको बता दें कि नौ मई, 2003 को लखीमपुर खीरी निवासी मधुमिता की पेपर मिल कालोनी, लखनऊ में दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। मधुमिता उस समय गर्भवती थी। मधुमिता के अमरमणि से करीबी संबंध थे। हत्या पर उठे सियासी भूचाल के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 23 जून, 2003 को हत्याकांड में सीबीआई जांच का फैसला लिया था। जांच में अमरमणि, उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी, मधुमणि के भतीजे रोहित चतुर्वेदी, शूटर संतोष राय व प्रकाश पांडेय को हत्याकांड में संलिप्त पाया गया।
आरोपियों के खिलाफ देहरादून सीबीआई कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया। इसी बीच पूर्व मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत की अर्जी दाखिल की, लेकिन उनके खिलाफ दर्ज 33 मुकदमों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जमानत नहीं दी। 2004 में मधुमिता की बहन निधि शुक्ला की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामला नैनीताल हाई कोर्ट स्थानांतरित कर दिया। ट्रायल के दौरान यज्ञ नारायण की मृत्यु हो गई थी। 2007 में सीबीआई कोर्ट देहरादून ने अमरमणि, मधुमणि, रोहित व संतोष को उम्र कैद की सजा सुनाई व 50-50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।












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