बिहार के बाहुबली ने जेल में बैठे-बैठे की पीएचडी

शुक्ला ने अपना शोध हिन्दी भाषा में किया है। उनका टापिक था.. हिन्दी उपन्यासों में राजनीतिक जागरूकता की अभिव्यक्ति। उनके शोध गाइड हैं रामेश्वर कॉलेज के देवानंद प्रसाद। प्रसाद ने कहा कि शुक्ला ने शुक्रवार को अपना फाइनल साक्षात्कार दिया। अब उन्हें बीआर अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय से डॉक्टर की डिग्री मिल जाएगी।
आपको बता दें कि मुन्ना शुक्ला की बाहुबली नेता के रूप में बिहार में ख्याति प्राप्त है। मुन्ना शुक्ला तब चर्चा में आए थे जब 1994 में गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया का उनपर हत्या का आरोप लगा था। इस मामले में उनपर स्थानीय अदालत ने आजीवन करावास की सजा सुनाई थी पर उन्हें पटना हाईकोर्ट से बरी कर दिया गया। कृष्णैया की हत्या उस समय हो गई जब मुन्ना शुक्ला के भाई की हत्या के विरोध में जुलुस निकल रहा था औऱ और कृष्णैया उसी बीच सामने आ गए। माना जा रहा था कि मुन्ना शुक्ला के बाहुबली भाई की हत्या में प्रशासन का हाथ था। उसके बाद मुन्ना शुक्ला बाहुबली बन बैठे। हालांकि वह राजनीति में कूदने की भी कोशिश किए। पर जेल में जाने के कारण उनका मार्ग अवरुद्ध हो गया पर उनकी पत्नी 2010 में वैशाली के लालगंज से चुनाव लड़ी औऱ अनु शुक्ला विजयी भी हुईं।
गौरतलब है कि मुन्ना शुक्ला के पहले बिहार के दो और नेता जेल में रहने के दौरान ही पीएचडी की डिग्री हासिल कर चुके हैं जिसमें सिवान के पूर्व सांसद और राजद नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन औऱ सुनील पांडेय शामिल हैं। शहाबुद्दीन को भी जेल में बंदी के दौरान ही पीएचडी की डिग्री मिली थी। वहीं सुनील पाण्डेय जिन्हें एक डॉक्टर के अपहरण के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी उस दौरान ही उन्हें वीर कुंअर सिंह विश्वविद्य़ालय से भगवान महावीर के अहिंसा के दर्शन पर पीएचडी की डिग्री हासिल हुई थी।












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