भाजपा की जीत नहीं कांग्रेस की हार रही महत्वपूर्ण

प्रदेश से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके पुत्र पार्टी महासचिव राहुल गांधी सांसद हैं। राजनीतिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण समझा जाने वाला यह राज्य नेहरु गांधी परिवार की शुरु से ही कर्मभूमि रही है। इस राज्य से कांग्रेस के 21 सांसद हैं जिनमें छह मंत्री और एक राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के अध्यक्ष हैं। इन सांसदों में सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी शामिल हैं। कांग्रेस सांसद अपने अपने क्षेत्रों में भी नगरीय निकाय चुनाव अपनी पार्टी के उ मीदवार को नहीं जिता सके।
वहीं सपा और बसपा के अधिकृत तौर पर चुनाव नहीं लडऩे की वजह से माना जा रहा था कि सपा का वोट बैंक समझा जाने वाला मुस्लिम समुदाय और बसपा का दलित मत कांग्रेस का समर्थन करेगा लेकिन कांग्रेस इसका भी लाभ नहीं उठा सकी। यह दोनो वर्ग ही पहले कांग्रेस का वोट बैंक रहा है।
मनमोहन सरकार में इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के क्षेत्र गोंडा की नगर पालिका परिषद में निर्दलीय उम्मीदवार जीत गया है जबकि केन्द्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल के गृह नगर कानपुर नगर निगम में भाजपा का महापौर निर्वाचित हुआ है। केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन आदित्य के क्षेत्र झांसी नगर निगम में भी भाजपा जीत गयी।
केन्द्रीय मंत्री आर.पी.एन सिंह और सलमान खुर्शीद भी अपने अपने क्षेत्रों कुशीनगर और फर्रुखाबाद में कांग्रेस उम्मीदवारों को सफलता नहीं दिला सके। यही नहीं श्रीमती गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली नगर पालिका परिषद में सपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार जीत गया और यही हाल अमेठी नगर पंचायत में रहा। राज्य के अन्य क्षेत्रों के साथ साथ कांग्रेस सांसदों के क्षेत्र में भी कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी।
नगर निकाय के पिछले चुनाव में तीन नगर निगमों इलाहाबाद, बरेली और झांसी में कांग्रेस के महापौर थे लेकिन इस बार इनमें तथा अन्य किसी नगर निगम में महापौर पद पर कांग्रेस नहीं जीती। तीन नगर निगमों में जीत का प्रदर्शन दोहराना तो दूर सपा व बसपा के चुनाव मैदान में न होने का लाभ भी कांग्रेस नहीं उठा सकी।












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