फर्जी मार्कशीट बनवा कर 70 लोग बन बैठे संस्कृत टीचर

अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी और पता लगाया जाएगा कि यह चूक किस स्तर पर हुई और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
प्रदेश के षिक्षा विभाग में फर्जी अंकपत्रों व प्रमाण पत्रों को बनना कोई नहीं बात नहीं है पहले भी कई बार फर्जी अंकपत्र मिलते रहे हैं। सरकार ने कई बार इस रोक लगाने की कोषिष की लेकिन षिक्षा माफियाओं की जड़े इतनी गहरी हैं कि इस पर कभी रोक लग ही नहीं पायी और यह कारोबार धड़ल्ले से चलता रहा।
संस्कृत विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी शशींद्र मिश्र के अनुसार तीन जिलों के डायट ने विशिष्ट बीटीसी में चयनित शिक्षकों के अंकपत्रों को सत्यापन विवि भेजा था। जांच में पता चला कि सहारनपुर के 32, आगरा के 28 व आजमगढ़ के 10 अकपंत्र फर्जी हैं। सूत्रों का कहना है कि काशी का संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में पहले भी इस प्रकार की घटनाएं हो चुकी हैं जब फर्जीअंक पत्र व प्रमाण पत्र पकड़ गए लेकिन कार्यवाही के नाम पर कुछ नहीं हुआ।
मिश्र के अनुसार विशिष्ट बीटीसी में चयनित अध्यापकों के 70 अंकपत्र 1990 से 1995 के हैं। इन पर जो नाम लिखे थे वे नाम परीक्षा विभाग के रजिस्टर में दर्ज नहीं हैं। कुछ अंक पत्र पूर्व व उत्तरा मध्यमा के हैं, कुछ शास्त्री के कुछ अंक पत्रों पर जिन अधिकारियों के नाम के हस्ताक्षर मिले हैं वे अधिकारी कभी विवि में तैनात थे ही नहीं। अंक पत्रों के फर्जी होने की सूचना विवि प्रशासन ने संबंधित डायटों को भेज दी है।
गौरतलब है कि जबसे बीएड छात्रों की नियुक्ति विशिष्ट बीटीसी में हो रही है तबसे फर्जी अंक पत्र प्रदेश के विभिन्न जिलों में बेचे जा रहे है। मालूम हो कि विशिष्ट बीटीसी में मैरिट के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन होता था यही कारण है कि अभ्यर्थी फर्जीअंक पत्रों का सहारा लेते हैं और बेहतर अंक पाने का दावा करते हुए चयनित हो जाते हैं। जब डायट से सत्यापन के लिए अंक पत्रों को विवि भेजा जाने लगा तब असलियत का खुलासा हुआ। विवि कार्यपरिषद ने इस फर्जीवाड़े की जांच को सीबीआई से कराने का मन बनाया है।












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