मिल गया गॉड पार्टिकल, घोषणा एक दो दिन में

हम जानते हैं यूनिवर्स में पाई जानेवाली हर चीज के द्रव्य की वजह हिग्स बोसोन ही है। हिग्स बोसोन के कारण ही आज यूनिवर्स है। वरना यूनिवर्स बनने के समय बने कण यू हीं अंतरिक्ष में प्रकाश की गति से चलते हुए खो जाते। न आकाशगंगा बनती न तारे बनते न हम होते। हालांकि यूरोपीय सेंटर फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (सर्न) के वैज्ञानिकऔपचारिक रूप से हिग्स बोसोन के वजूद की घोषणा से पहले पुख्ता डाटा इकट्ठा कर लेना चाहते थे। हालांकि पिछले कई प्रयोगों से इसके प्रमाण मिल रहे थे।
वैज्ञानिक ओलिवर बुकमिलर ने आज यहां कहा कि यह प्रमाण 99.999 से भी आगे पहुंच चुका है। यूनिवर्स के वजूद के पीछे हिग्गस बोसोन कण है, लेकिन कभी भी इसके वजूद के प्रमाण नहीं मिल सके थे। हिग्स बोसोन बनने के कुछ पल में ही नष्ट हो जाता है। लेकिन इस दौरान वह लंबे समय तक टिकने वाले दूसरे कण में बदल जाता है । दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशाला स्विट्जरलैंड केसर्न में चल रहे बरसों के प्रयोग के बाद मंगलवार को वैज्ञानिकों ने दावा किया कि हिग्स बोसोन कण के वजूद के प्रमाण मिल गए हैं।
हिग्स की खोज को इस सदी की सबसे बड़ी खोजों में माना जा रहा है। सर्न के अंदर दो अलग अलग प्रयोग किए जा रहे हैं। इनका नाम एटलर और सीएमस है। दोनों का लक्ष्य हिग्स कण का पता लगाना था । कई किलोमीटर लंबी सुरंगनुमा प्रयोगशाला तैयार की गई थी, जिसमें तीन साल से भी ज्यादा समय से प्रयोग चल रहा था। यहां बिग बैंग विस्फोट जैसा माहौल तैयार किया गया था, ताकि इसके रहस्यों को समझा जा सके। यहां बता दें कि हिग्स बोसोन में बोसोन शब्द भारत के वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस के नाम पर रखा गया है। यह अलग बात है कि इसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे।












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