माही की मौत के बाद खुली सरकार की नींद, बोरवेल के साथ मेनहोल भी ढके

Haryana government comes into action after Mahi's death
गुडग़ांव। पांच साल की मासूम माही की मौत के बाद गुडग़ांव प्रशासन की नींद खुली है। डीसी पीसी मीणा बोरवेल के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश लागू करने की हिदायत दी है। उन्होंने अधिकारियों को खुले बोरवेलों के खिलाफ दो दिन में पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने को कहा है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2010 में सभी प्रदेश सरकारों के लिए निर्देश जारी किया था कि जिला प्रशासन की अनुमति के बिना कहीं भी बोरवेल की खुदाई करने न दी जाए।

कोर्ट ने बोरवेलों पर नियमित निगरानी के लिए भी कलेक्टर की जिम्मेवारी तय की है। कोर्ट के निर्देश को दो वर्ष हो चुके हैं, मगर प्रशासन ने इस दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। हालांकि, प्रशासन ने आम लोगों और बोरवेल खोदने वाली एजेंसियों को तमाम हिदायतें दी हैं, मगर सभी हिदायतें बेअसर साबित हुई। डीसी ने एजेंसियों का पंजीकरण और बोरवेल खुदाई करने वाली मशीन की गतिविधियों की नियमित जानकारी देना अनिवार्य किया है।

मगर, इस पर भी कोई अमल नहीं हुआ। घटना से सबक लेते हुए अब नगर निगम खुले मैनहोल और गड्ढों को ढकेगा। निगम कमिश्नर ने एक्सईएन को ऐसे सभी मैनहोल, नाले और गड्ढे ढकने के निर्देश दिए हैं, जो खुले हैं। उल्लेखनीय है कि नगर निगम क्षेत्र में कई स्थानों पर सीवर मैनहोल के ढक्कन खुले हैं।

गुडग़ांव प्रशासन ने गंभीरता से नहीं ली हिदायतें

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की अवहेलना करने पर गुडग़ांव के प्रशासनिक अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। गुडग़ांव का जिला प्रशासन यदि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन कर खुले बोरवेल ढकवा देता और आरोपी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई करता तो माही की जिंदगी बच सकती थी। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांग रखी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी मुख्य सचिव के माध्यम से राज्य सरकार को बोरवेल के मामले में आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं।

प्रदेश के मुख्य सचिव पीके चौधरी इस समय अमेरिका यात्रा पर हैं। वह दो दिन बाद लौटेंगे। अमेरिका से लौटने के बाद इस पूरे प्रकरण की नए सिरे से समीक्षा करने का दावा किया जा रहा है। तब तक राज्य के गृह विभाग को समस्त मामले पर निगाह रखने की हिदायत दी गई है।
प्रशासन को सांसद ने कठघरे में खड़ा किया

गुडग़ांव सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने मानेसर स्थित कासन की ढाणी में एक बोरवेल में गिरकर पांच वर्षीय बच्ची माही की मौत को लेकर जिला प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है।

उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार खुले बोरवेल को बंद करवाने की जिम्मेवारी जिला प्रशासन की थी। सांसद ने कहा कि भविष्य में ऐसे मामले नहीं हों और उनसे कैसे निपटा जाए, यह भी जांच का विषय होना चाहिए। अपने जारी बयान में सांसद ने इस दुर्घटना से सबक लेते हुए आपदा प्रबंधन को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। सांसद ने मृतका माही के माता-पिता के प्रति गहरी शोक संवेदना प्रकट की।

गिरफ्तार नहीं हुआ माही का आरोपी

गांव कासन की ढाणी में बोरवेल में गिरने से 4 वर्षीय माही की मौत के मामले में पुलिस मकान मालिक रोहताश को पांच दिन बाद भी गिरफ्तार नहीं कर सकी है।क्राइम ब्रांच और मानेसर थाना पुलिस की पांच टीमें रोहताश की तलाश में छापेमारी कर रही हैं। बताते चलें कि माही के पिता नीरज रोहताश के मकान में ही किराए पर रहते हैं। रोहताश दिल्ली के नजफगढ़ निवासी हैं।उनके खिलाफ अवैध तरीके से बोरवेल खुदाई कराने और माही की उसमें गिरकर मौत के संबंध में एफआईआर दर्ज की गई है।उसी मकान में एक बोरवेल और मिलने से पुलिस ने एक और मुकदमा रोहताश के खिलाफ दर्ज किया।

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