वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए होगी खूंखार कैदियों की पेशी

इस संबंध में योजना पर विचार विमर्श करते हुए पुलिस महानिरीक्षक आलोक मित्तल ने कहा कि पूरे मामले की कमान उनके हाथ में होगी। शुरुआती दौर में चारों जिलों से एक-एक मामले का चयन कर इसकी शुरुआत की जाएगी। इस बारे में पुलिस महानिरीक्षक ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए है और पुलिस अधीक्षकों को अपने जिले के एक संगीन मामले के चयन करने को कहा गया है।
रोहतक, पानीपत, सोनीपत व झज्जर के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए है कि वे अपने-अपने जिले में एक संगीन मामले का चयन कर एक सप्ताह के अंदर इस बारे में रिपोर्ट भेजें। रिपोर्ट में मुकदमा नंबर, तिथि, धारा, थाना, अदालत के बारे में विस्तार से अवगत कराएं।
पुलिस कप्तानों को साफ निर्देश दिए गए है कि वे स्वयं सत्र न्यायाधीश से मिलकर पूरे मामले की ट्रायल कान्फ्रेंसिंग के जरिए करवाएं। रेंज के पुलिस प्रवक्ता अजीत सिंह ने बताया कि कान्फ्रेंसिंग जरिए मामले की ट्रायल करवाने का मुख्य उद्देशय है कि एक तो अपराधी किसी तरह भी ट्रायल प्रभावित नहीं कर पाएगा। सबसे बड़ी बात तो यह रहेगी कि गवाह को भी किसी प्रकार का खतरा नहीं होगा। पुलिस महानिरीक्षक का कहना है 25 जून तक इस बारे में रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। इसका रिस्पांस अच्छा रहा तो मामलों की संख्या में इजाफा किया जाएगा।
780 कैदियों की कान्फ्रेंसिंग के जरिए हुई पेशी
विभिन्न मामलों में जेल में बंद 780 कैदियों ने अप्रैल व मई माह में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए हाजरी लगाई। अप्रैल माह में पानीपत से 163, सोनीपत से 150, झज्जर से 77 व रोहतक से 1 विचाराधीन कैदी की कान्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी करवाई गई। इसी तरह से मई माह में झज्जर से 37, सोनीपत से 223 व पानीपत से 129 कैदियों की कान्फ्रेंसिंग करवाई गई। पुलिस महानिरीक्षक आलोक मित्तल ने कहा है कि अदालतों व जेल में यह सुविधा होने के बावजूद भी इसका बहुत कम इस्तेमाल किया जा रहा है जो कि ठीक नहीं है। उन्होंने निर्देश जारी किए है कि अधिक से अधिक पेशी विडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए करवाई जाएं।












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