मच्‍छर जो नहीं चूसता खून, फिर भी खतरनाक

New mosquito species does not need blood
सिडनी। न्‍यूज वेबसाइट आईबीएन सेवेन के अनुसार आस्‍ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने एक चौकाने वाला सच हमारे सामने लाया है। उन्‍होंने मच्‍छरों की एक ऐसी प्रजाति को खोज निकाला है, जो खून नहीं चूसते। मच्‍छरों को अंडे देने के लिए खून चूसने की जरूरत होती है, लेकिन वैज्ञानिको ने एक ऐसी प्रजाति को खोज निकाला है जिनको अंडे देने के लिए खून चूसने की जरूरत नहीं पड़ती।

इस प्रजाति की मादांए अंडे देने के लिए अपने शरीर में लगे पोषक तत्‍वों का प्रयोग करती है। इस क्षमता को वैज्ञानिक भाषा में ऑटोजेनी कहा जाता है। अन्‍य प्रजाति के मच्‍क्षरों को अंडे देने के लिए खून चूसना पड़ता है। इस तरह के मच्छर जल निकासी टैंकों और पाइपों में अपना घर बनाते है। वैज्ञानियों ने ऐसा पाया कि इस तरह के मच्‍छर भूमिगत जीवन के लिए ही अनुकूल होते है।

इस तरह के मच्‍छर तालाबों या खुले जलाशयों में नहीं पाये जाते है। यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी मेडिकल स्कूल के कीट विज्ञानी एवं शोध दल के प्रमुख कैमरन वेब के अनुसार इस प्रजाति में कई चौकाने वाली बातें है। उनके अनुसार अगर इस प्रजाति की मादा को खून दिया जाए तो यह तबतक नहीं काटती जबतक वह अंडे ने देगी।

यह खोज हमारे लिए एक बड़ी सीख शाबित हो सकती है, क्‍योंकि हम जल के उपयोग के लिए भूमिगत जल संग्रहण व्‍यवस्‍था करते है। हमको संग्रहण व्‍यवस्‍था की डिजाईनिंग कराते समय मच्‍छरों के खतरों को ध्‍यान में रखना चाहिए, क्‍योंकि यह मच्‍छर खून नहीं चूसता लेकिन बीमारी तो फैलाता ही है। इस प्रजाति की खोज के लिए वैज्ञानिकों ने 2 साल का समय बिताया है।

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