देश नहीं चाहता कट्टर चेहरा: शिवानंद तिवारी

इस बदले हुए रूख को आरएसएस का भी समर्थन प्राप्त था । तिवारी ने कहा कि चुनाव के बाद के सर्वेक्षणों में यह उल्लेख किया गया था कि अगर गुजरात में हुए दंगों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मोदी सरकार को बर्खास्त कर दिया होता तो 2004 के आम चुनाव में राजग पराजित नहीं होता। जदयू नेता ने कहा कि वाजपयी ने मोदी से राजधर्म का पालन करने को कहा था और चाहते थे कि सरकार जाये लेकिन इस प्रयास पर लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं ने विटो कर दिया।
तिवारी ने कहा कि गुजरात दंगों के बाद ऐसे लोग पार्टी से विमुख हो गये जिन्होंने वाजपेयी के उदार चेहरे के चलते भाजपा को वोट दिया था और अस्थिर (फलोटिंग) वोट कांग्रेस के खाते में चला गया क्योंकि देशवासी कट्टर राजनीति को स्वीकार नहीं करते। तिवारी के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा ने कहा कि किसी को भी उसके नेताओं की धर्मनिरपेक्ष विश्वसनीयता पर फतवा जारी करने का अधिकार नहीं है।












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