अभी भी बंगाल में अटका प्रणब का भविष्य

वैसे वाम नेता अतुल अंजान ने इसकी हनक भी दे दी है। उन्होंने कहा कि प्रणब की दावेदारी का हम कैसे समर्थन कर सकते हैं जबकि वे हमें बंगाल की खाड़ी में गाड़ने की बात करते हैं। पर सूत्र बता रहे हैं कि वाम दलों का एक धड़ा प्रणब के पक्ष में है तो दूसरा उनके विरोध में उतर आय़ा है। अब ये दल 21 जून को बैठक करने जा रहे हैं जहां वे इसपर चर्चा करेंगे कि वे राष्ट्रपति चुनाव में क्या रणनीति अपनाते हैं। हालांकि ममता के यूपीए से विरोध के बाद संभावना है कि ये दल अंतिम में प्रणब का समर्थन कर दें।
वैसे माकपा ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुने जाने के लिए बधाई देकर कुछ संकेत जरूर दे दिए हैं पर अभी उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सभी वाम दल सलाह मशविरा करने के बाद ही कोई फैसला करेंगे। माकपा नेता वृंदा करात ने कहा कि हम संप्रग की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाये जाने के लिए प्रणब मुखर्जी को बधाई देते हैं। वह काफी वरिष्ठ कांग्रेस नेता हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे मौकों पर लोगों को बधाई देना सामान्य शिष्टाचार है। यह पूछने पर कि क्या 21 जुलाई को होने वाले चुनाव में क्या वाम दल मुखर्जी का समर्थन करेंगे, वृन्दा ने कहा कि समर्थन के मुद्दे पर पहले हम अपनी पार्टी के स्तर पर और फिर अन्य वाम दलों के साथ विचार विमर्श कर निष्कर्ष निकालेंगे। पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा पोलितब्यूरो के सदस्य बुद्धदेव भट्टाचार्य ने आज कहा कि चार वामदल थोड़ी देर में दिल्ली में बैठक करके राष्ट्रपति चुनाव पर आगे के रूख पर फैसला करेंगे।












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