जाट आरक्षण के लिए मैदान में कूदे हुड्डा

आपको बता दें कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग पहले ही जाटों को आरक्षण की मांग खारिज कर चुका है। प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप के बाद आयोग दोबारा इस मुद्दे पर विचार के लिए तैयार हुआ है। इसके बाद से जाट राजनीतिज्ञ अपनी तरफ से केंद्र पर दबाव बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही रालोद सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह भी जाट आरक्षण के मुद्दे पर गृहमंत्री से मिल चुके हैं। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी जाट आरक्षण की मांग का समर्थन किया है।
चिदम्बरम से मुलाकात के बाद हुड्डा बताया कि शिष्टमंडल ने गृह मंत्री को ज्ञापन सौंपा है और मांगों पर जल्द से जल्द विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि शिष्टमंडल में पांच राज्यों हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सांसद, पूर्व सांसद, विधायक व वरिष्ठ नेता शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल में राजस्थान से केन्द्रीय राज्य मंत्री महादेव खंडेला और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष चन्द्रभान, हरियाणा से अखिल भारतीय कांगे्रस समिति के महासचिव चौधरी बीरेन्द्र सिंह, सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा, श्रीमती श्रुति चौधरी, जितेन्द्र सिंह मलिक, पूर्व सांसद जयप्रकाश, मुख्य संसदीय सचिव धर्मबीर सिंह, विधायक आनंद सिंह दांगी, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष योगानन्द शास्त्री , सांसद रमेश कुमार, पंजाब से विपक्ष के नेता सुनील जाखड़, उत्तर प्रदेश से पूर्व सांसद बिजेन्द्र सिंह, हरेन्द्र सिंह मलिक तथा विधायक पंकज मलिक शामिल थे।
गृहमंत्री से बातचीत में शिष्टमंडल के सदस्यों ने कहा कि जाट मुख्य रूप से ग्रामीण और कृषक समुदाय के हैं, जिनका देश के अनाज भंडार में बड़ा योगदान है। लेकिन यह भी वास्तविकता है कि इस समुदाय के 95 प्रतिशत लोग मामूली किसान हैं, जिनके पास रोजगार के लिए दो एकड़ से भी कम की जोत हैं। जाट समुदाय में इस तरह की भावना है कि समान पृष्ठभूमि वाले अन्य कृषक समुदायों के मुकाबले उन्हें आरक्षण के लाभ से वंचित रखा गया है। इससे उन्हें लगता है कि उनके साथ भेदभाव हुआ है।












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