अल्पसंख्यक आरक्षण पर केंद्र को सुप्रीम कोर्ट ने हड़काया

Supreme Court
दिल्ली (ब्यूरो)। अल्पसंख्यकों के लिए चार फीसदी आरक्षण की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को हड़काया है साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण के तरीके पर अपनी नाराजगी जताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए है। उधर, इस फैसले से आहत यूपी सरकार अपने चुनावी वादे पूरे करने के लिए एक बार फिर नए सिरे से इस पर मंथन शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि सरकार इस बार विधायी प्रक्रिया के तहत कोर्ट में अपनी दावेदारी पेश करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय शैक्षणिक संस्थाओं में अल्पसंख्यकों के लिए 4.5 फीसदी आरक्षण का प्रावधान निरस्त करने के आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। न्यायालय इस मामले में केंद्र सरकार की याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा।

न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की खंडपीठ ने इस संवेदनशील मसले के प्रति केंद्र सरकार के रवैये पर नाराजगी व्यक्त की। न्यायाधीशों ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए केंद्र सरकार द्वारा आरक्षण के समर्थन में दस्तावेज संलग्न नहीं करना आश्चर्यजनक है। आपको बता दें कि दिसंबर में केंद्र सरकार ने पिछड़े वर्ग के लिए तय 27 फीसदी आरक्षण से अल्पसंख्यकों को 4.5 फीसदी आरक्षण देने का आदेश जारी किया था। पिछले महीने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने इसे धर्म आधारित बताकर रद कर दिया था।

सरकार ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। केंद्र सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल जीई वाहनवती ने अदालत से तत्काल राहत की मांग करते हुए कहा, आईआईटी में 325 छात्रों को इसका लाभ मिलने वाला है। वहां काउंसलिंग शुरू हो चुकी है अगर हाई कोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगी तो उन्हें नुकसान होगा। कम से कम इन छात्रों को काउंसलिंग में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी जाए।

वाहनवती ने हाई कोर्ट के आदेश को गलत बताते हुए कहा, यह कोई नया आरक्षण नहीं है बल्कि 1993 से पिछड़ों के लिए लागू 27 फीसदी में से ही अल्पसंख्यकों को कोटा दिया गया है। हालांकि इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने अल्पसंख्यकों के लिए 4.5 फीसदी आरक्षण निर्धारित करने के बारे में अटार्नी जनरल से कई सवाल किए। न्यायाधीश जानना चाहते थे कि सरकार ने अन्य पिछड़े वर्ग के 27 फीसदी आरक्षण में से अल्पसंख्यकों के लिए 4.5 फीसदी आरक्षण किस आधार पर निर्धारित किया।

उधर, सुप्रीम कोर्ट में अल्पसंख्यक आरक्षण पर कोई राहत नहीं मिलते देख उत्तर प्रदेश की सपा सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए विधायी तरीका अपनाने का फैसला किया है। रणनीति के तहत अखिलेश सरकार विधानसभा से प्रस्ताव पारित कराने के बाद उसे केंद्र को भेजकर मंजूरी दिलाने के लिए दबाव बनाएगी। सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने मुस्लिम आरक्षण के लिए संविधान संशोधन की पैरवी की है। सूत्रों के मुताबिक, 2014 के लोकसभा चुनाव में बेहतर जीत के लिए अभी से जुटी सपा मुस्लिमों को ज्यादा आरक्षण पर कोई समझौता नहीं चाहती।

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