एबॉर्शन कर कुत्तों को खिलाता था कन्या भ्रूण

अब सब फिर पहले जैसा है। आज भी देश में कन्या भ्रूण हत्या उसी तेजी से हो रही है जैसे पहले होती थी बस करने का अंदाज बदला है। इसी क्रम में महाराष्ट्र में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आयी है जहां राज्य के बीड में एक डाक्टर है जो की कन्या भ्रूण का गर्भपात करने के बाद उन्हें अपने पालतू कुत्तों को खिला देता है। डाक्टर ये सब सिर्फ इसलिए करता है ताकि उसके खिलाफ कोई सुबूत बाकी न रहे। आपको बता दें की इस खौफनाक काम में केवल डॉक्टर ही नही बल्कि उसकी पत्नी भी शामिल थी। डॉक्टर सुदम मुंडे के खिलाफ जांच में ठोस सुबूत मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच से कराने के आदेश दिए हैं।
गौरतलब है की ऐसा पहली बार हुआ है जब एक डॉक्टर पर प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटाल डायग्नॉस्टिक टेक्नीक्स एक्ट (पीसीपीएनडीटी) के तहत मामला दर्ज हुआ है और इसकी जांच पुलिस के बजाय क्राइम ब्रांच को सौंपी जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बच्चे के लिंग का पता लगाने तथा गर्भपात के काम में लगे इस डॉक्टर दंपती ने चार कुत्ते पाल रखे थे। ये लोग मृत भ्रूण को कुत्तों को खिला देते थे ताकि कोई सुबूत नहीं मिल सके।
जिले की पर्ली तहसील में क्लीनिक चलाने वाले डॉ. मुंडे दंपती के काले कारनामों का चिठ्ठा तब खुला जब इनके यहां 18 मई को 28 साल की महिला विजयमाला पाटेकर भर्ती हुईं। उन्हें छह महीने का गर्भ था और गर्भ गिराने के चक्कर में उनकी मौत हो गई। पाटेकर की चार लड़कियां थीं।
वह एक और लड़की नहीं चाहती थीं। अब क्राइम ब्रांच इस बात का पता लगाने का भी प्रयास कर रही है कि ये लोग क्लीनिक का लाइसेंस रद्द होने के बाद भी काम कैसे कर रहे थे। आपको बता दें की करीब 2 साल पहले भी कन्या भ्रूण हत्या के सिलसिले में ही क्लीनिक का लाइसेंस रद्द हुआ था।
सूत्रों ने जानकारी देते हुए बताया कि ये लोग दो साल पहले एनजीओ लेख लड़की अभियान के स्टिंग आपरेशन में पकड़े गये थे। इसके बाद उनके क्लीनिक का लाइसेंस रद्द कर दिया गया और सोनोग्राफी मशीन सील कर दी गई। इसके बावजूद एक साल से कम समय में डाक्टर मुंडे ने दोबारा यही काम करना शुरू कर दिया।
यह डाक्टर दोबारा चर्चा में तब आया जब उनके फार्म में जून 2011 में एक भ्रूण पाया गया। बीड के एसपी मांडलिक दत्तात्रेय के अनुसार इन लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 ए तथा 201 के तहत मामला दर्ज किया गया है।ज्ञात हो कि महाराष्ट्र में बीड जिले में लिंगानुपात सबसे कम है। यहां एक हजार लड़कों पर कुल लड़कियों की संख्या 801 है।
एक महान लेखक ने लिखा है कि स्त्री की अवनति और उन्नति पर ही राष्ट्र की उन्नति निर्भर है, लेकिन क्या समाज में यह विचार घर कर पाया है। क्या मासूमों को गर्भ में ही मौत देने वाला समाज अपने अंर्तमन को टटोलने के लिए तैयार हो पाया है। ऐसी घटनाओं को देखने के बाद शायद हमारे मुह से अनायास ही ये निकले
"नहीं "।












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