एचआईवी संक्रमित बच्चों ने बनायी सबसे लम्बी रेड रिबन

ऐसे ही बच्चों के जीवन की हकीकत को उजागर करने के लिए एक जागरूकता अभियान चलाया गया। जिसके तहत अब तक की सबसे लम्बी बच्चों के हाथ से रेड रिबन तैयार की गयी। यह रिबन दुनिया के सबसे लम्बी रिबन है जिसे अन्तर्राष्ट्रीय एड्स अनाथ दिवस 7 मई 2012 से ठीक एक दिन पहले 6 मई 2012 को लोगों के सामने पेश किया जाएगा।
15 वर्ष की आयु से कम वाले बच्चों में नब्बे प्रतिशत से ज्यादा बच्चों में एचआईवी के प्रसार का मुख्य कारण अभिवावक से बच्चे का रास्ता है। एक आंकड़े के अनुसार 2499 लड़के और 1271 लड़कियां प्रदेश के विभिन्न एन्टी रिट्रोवायरल थैरेपी (ए0आर0टी0) सेन्टर पर पंजीकृत हैं। जबकि हकीकत में यह संख्या इससे कहीं अधिक है।
ऐसे बच्चों के लिए जागरूकता अभियान चलाने में यूनिसेफ व अन्य संगठनों ने काफी सहयोग दिया। यह अभियान बूचड़ी मैदान कैन्टोमेंट लखनऊ में आयोजित हुआ। इस अभियान का विषय शून्य को पाना है- शून्य नये एचआईवी संक्रमण, शून्य भेदभाव, और शून्य एड्स से होने वाली मौत। यह विषय यू.एन. एड्स के अभियान 'शून्य को पाना' के साथ समावेशित है।
यूनिसेफ अधिकारियों का कहना है कि एचआईवी से पीडि़त बच्चों के साथ भेदभाव होने के प्रमाण भी मिले हैं। जैसे कि बच्चे को विद्यालय से निकाल दिया गया, उन अभिवावकों की शिकायत पर जो ये सोंचते थे कि अगर उनका बच्चा एचआईवी संक्रमित बच्चे के साथ पढ़ेगा तो उनके बच्चे को भी संक्रमण हो सकता है। जबकि यह सच नहीं है।
संस्था उम्मीद की प्रमुख ऊषा अवस्थी का कहना है कि एचआईवी का प्रसार अभी कम हो गया है लेकिन अभी भी कुछ कारण हैं जो इसे कमजोर कर रहे हैं। एचआईवी का प्रसार सबसे ज्यादा पूर्वी जिलों में है। श्रीमती अवस्थी ने बताया कि मौजूदा सबसे में सबसे लम्बा रिबन 408.55 मीटर (1,340 फीट, 4.8 इंच) जो कि चाय लॉइफ लाइन और कैम्प सिम्का द्वारा कैम्प सिम्का, ग्लेन स्पेय, न्यूयार्क अमेरिका में 18 जुलाई 2011 को बनाया गया था।












Click it and Unblock the Notifications