असंगठित मजदूरों पर एनएसी और सरकार आमने-सामने

सूत्रों ने बताया कि एनएसी ने इस मामले में केंद्र के रवैये की कड़ी ने आलोचना की है औऱ कहा है कि असंगठित मजदूर सामाजिक सुरक्षा कानून के पारित होने के तीन साल बाद भी इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को छोड़ दिया जाए तो सरकार ने असंगठित मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
इस बीमा योजना का लाभ सिर्फ नौ करोड़ मजदूरों तक पहुंच रहा है। जबकि असंगठित क्षेत्र के मजदूर तमाम आर्थिक गतिविधियों को गति दे रहे हैं, लेकिन उन्हें कम से कम वेतन पर ज्यादा से ज्यादा काम करना पड़ता है। उन्हें भोजन, सेहत, बीमा और पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलतीं। असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को दोहरा कष्ट उठाना पड़ता है।
आपको बता दें कि कि कुछ दिनों पहले ही समिति ने रेहड़ी और खोमचे वालों की आजीविका और सामाजिक सुरक्षा को लेकर सरकार की नकेल कसा था पर सरकार इन मामलों में सुस्त ही दिखी। हालांकि एक साल के बाद अब इस संबंध में नीति का मसौदा तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है, लेकिन रेलवे की जमीन पर रेहड़ी को मान्यता देने, सड़क किनारे एक निश्चित हिस्सा इसके लिए आरक्षित करने तथा शिकायत निवारण के लिए अपीली तंत्र बनाने जैसे मुद्दों पर अभी भी अड़ंगा है।












Click it and Unblock the Notifications