अक्षय तृतीया पर एमपी में जमकर होते हैं बाल विवाह

मध्यप्रदेश सरकार हर साल की तरह इस वर्ष भी अक्षय तृतीय अथवा आखा को बाल विवाह की रोकथाम करेगी। राज्य शासन ने बाल विवाह रोकने के लिए बाल विवाह रोक थाम अभियान 2012 भी चलाने का निर्णय लिया है। समस्त जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी कर कड़े कदम उठाने के निर्देश दिये है। कलेक्टरों को भेजे पत्र में उनका ध्यान कुछ ऐसी विशेष तिथियों की ओर दिलाया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में सामूहिक बाल विवाह होते हैं इन तिथियों में साल 24 अप्रैल को पड़ने वाली अक्षय तृतीया अथवा आखा तीज भी विशेष है।
इस दिन होने वाले सामूहिक विवाह की आड़ में कुछ बाल विवाह भी हो जाते हैं। शासन-जिला प्रशासन की मुस्तैदी और उठाए गये सख्त कदमों से होने वाले बाल विवाह को रोका जा सकता है।
शासन ने जिला कलेक्टरों से कहा है कि वे हर साल की तरह इस वर्ष भी अपने जिले में ऐसे प्रयास करें कि किसी भी परिस्थिति में कोई भी बाल विवाह नहीं हो सके। निर्देशों में कहा गया है कि इसके लिये वे समाज के ऐसे प्रभावशाली व्यक्तियों एवं समूहों का सहयोग लें, जो वैवाहिक कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सही उम्र में विवाह का महत्व, कम उम्र में विवाह के दुष्परिणाम आम नागरिकों तक पहुंचाने के लिए बेहतर प्रचार -प्रसार करें। इसमें स्थानीय मीडिया का भी सहयोग लेने को कहा गया है।
निर्देशों में आम जनता को राज्य सरकार द्वारा बालिकाओं के हित में चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी देते हुए बाल विवाह नही करने की सलाह देने को कहा गया है। कलेक्टरों से कहा गया है कि वे जिले के किसी भी शासकीय काल-सेंटर को बाल विवाह की सूचना देने के लिए स्थायी रुप से अधिकृत करें। काल-सेंटर के फोन नंबर का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि कोई भी व्यक्ति संभावित बाल विवाह की सूचना कभी भी फोन पर दे सके।












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