गुजरात दंगा: 18 आरोपियों को उम्रकैद, 5 को सात साल की कैद

इससे पहले आणंद जिले में संप्रदायिक हिंसा के दौरान मारे गये 23 लोगों के मामले गुजरात की विशेष अदालत ने 23 लोगों को दोषी करार दिया था, जबकि 23 लोगों को इस मामले से बरी किया था। इस मामले में 47 लोगों पर हत्या के आरोप थे। चूंकि एक आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है।
इसलिए बचे हुए 46 लोगों को कठघरे में खड़ा किया गया, जिनमें 23 को दोषी करार दिया गया। ये फैसला जिला एवं सत्र अदालत की न्यायाधीश पूनम सिंह ने सुनाया था। यह उस समय का मामला है, जब 2002 में गोधरा कांड के बाद पूरे राज्य में दंगे फैल गये थे। उसी दौरान आणंद के ओड में कुछ लोगों ने घरों में घुस कर 23 लोगों की हत्या कर दी थी।
इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसआईटी ने जांच कर चार्जशीट दायर की थी, जिसकी जांच एसआईटी ने नंवबर 2009 में शुरू की थी और इस मामले की सुनवाई के दौरान एसआईटी ने 58 लोगों को गवाही देने के लिए पेश किया था। इस मामले में 150 लोगों की गवाही हुई जबकि 170 से अधिक दस्तावेजी साक्ष्य अदालत में पेश किए गए। मामले की सुनवाई भी 2009 में ही शुरू हुई थी।












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