ऐसा गांव जहां पानी के कारण नहीं मिलती दुल्हन

बेचारों को लड़की वाले शादी करने से इनकार कर देते हैं। डार्क जोन में शामिल हो चुके खोल खंड के गांव नांधा में घी मिल जाएगा लेकिन पानी नहीं। इस गांव में लोग अपनी बेटियां ब्याहने को तैयार नहीं हैं। लड़कों के लिए रिश्ते आने बंद हो गए हैं। गांव वालों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इस गांव की सुध नहीं ली तो ग्रामीण यहां से पलायन कर देंगे। खोल खंड का भूजल स्तर करीब 600 फीट तक गिर गया है।
यहां प्रति वर्ष 30 से 40 फिट भूजल स्तर नीचे जा रहा है। नांधा में कुछ दिन पहले जन स्वास्थ्य विभाग के ट्यूबवेलों से आने वाला खारा पानी भी आना बंद हो गया हैं। जल स्तर नीचे जाने के कारण करीब 20 दिनों से ट्यूबवेल भी ठप हो चुके हैं। जिला पार्षद कुमारी गीता, सरपंच बिजेन्द्र सिंह, ब्लॉक समिति सदस्य रामरती देवी, समाजसेवी गजराज निनानियां ने बताया कि पानी के इस संकट के कारण गांव के लड़कों के लिए रिश्ते आने भी बंद हो गए हैं।
पांच रूपये प्रति मटका मिलता है पानी
जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता एमआर खुराना ने माना कि नांधा में पेयजल की भारी समस्या हैं। पंचायत ने नए बोर के लिए जगह भी मुहैया करा दी है। एक-दो दिन में नया बोर करवा कर समस्या दूर कर दी जाएगी। डिग्गी बनाने का कार्य उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
सरपंच बिजेन्द्र यादव ने बताया कि दिसंबर, 2011 को नांधा, बलवाड़ी व भालखी गांवों के लिए नहरी पानी आधारित परियोजना का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था, लेकिन अभी मंजूर नहीं हुआ है। इस परियोजना के तहत डिगी के लिए पंचायत जमीन भी देने को तैयार है। उन्होंने इस परियोजना को शीघ्र मंजूरी देकर पूरा कराने की मांग की है।
ग्रामीण पहाड़ी पार 3 किलोमीटर दूर स्थित गांव खोल के प्राइवेट नलकूपों से पानी लाते हैं या प्राइवेट टैंकर चालकों से 5 रुपए प्रति मटका खरीद कर पीना पड़ रहा है। निम्न मध्यम वर्ग के लोगों के सामने बड़ी समस्या यह है कि वे रोज खरीद कर पानी नहीं पी सकते।












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