यूपी में बिना काम नहीं मिलेगा बेरोजगारी भत्ता

यह निर्देश तो जारी कर दिया गया है, लेकिन अभी यह तय नहीं हुआ है कि भत्ते के लिए आखिर क्या काम करना होगा। जिलाधिकारियों को यह निर्देश दे दिए गए हैं कि बेरोजगारों के लिए कार्य को सृजन किया जाए।
ज्ञात हो कि नियोजन कार्यालयों में भत्ते के लिए पंजीकरण कराने वालों में सबसे अधिक महिलाएं व लड़कियां थीं जो नया आदेश जानने के बाद काफी आक्रोषित हैं।
विधान चुनाव पूर्व 35 वर्ष से ऊपर के सभी युवाओं को एक हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता दिए जाने की घोषणा की। प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद युवाओं को यह यकीन हो गया अब उन्हें एक हजार रुपए प्रतिमाह मिलना तो तय ही है। इसके बाद तो नियोजन कार्यालयों में युवाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कर्ई बार लाठियां खाने के बाद भी युवाओं ने बेरोजगारों की श्रेणी में पंजीकरण करा ही लिया।
पंजीकरण कराने वालों में महिलाओं का प्रतिशत सबसे अधिक रहा। बेरोजगारों की बढ़ती संख्या से परेशान सरकार ने जब पैसा बांटने का आंकलन किया तो पता चला कि उसे 650 करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी होगी फिर क्या था भत्ता दिए जाने के मामले में नये-नये नियम जोड़ जाने लगे। पहले दस्तावेजों का सत्यापन, अभ्यर्थियों को पुलिस रिकॉर्ड और अब नया नियम जोड़ा गया कि भत्ते के बदले अभ्यर्र्थी को कुछ कार्य भी करना होगा।
सरकार के नये नियमों को जानने के बाद अब प्रदेश के बेरोजगार सरकार की मंशा पर शक करने लगे हैं। ज्ञात हो कि पंजीकरण कराने वालों में सभी बेरोजगार ही नहीं थे करीब 90 प्रतिशत ऐसे लोगों ने आवेदन किया है जो निजी संस्थानों में कार्य कर रहे हैं या फिर उनका खुद का कारोबार है लेकिन सरकारी धन के लालच में वह खुद को बेरोजगार बताने पर तुले हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि कुशल बेरोजगारों के लिये काम का सृजन करें ताकि बेरोजगारों को भत्ता दिया जा सके। अधिकारियों के अनुसार बेरोजगारी भत्ता मामले की औपचारिकता पूरी कर ली गयी हैं तथा इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।












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