अब पांच साल का होगा डिग्री कोर्स

Students
दिल्ली (ब्यूरो)। अब देश में स्नातक की पढ़ाई पांच साल की होगी। हालांकि तीन साल बाद कोर्स बीच में छोड़ने की अनुमति होगी। ऐसे छात्रों को तीन साल की डिग्री दे दी जाएगी। सभी विश्वविद्यालयों में जल्द ही स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों का स्वरूप बदला हुआ दिखाई देगा। यूजीसी ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत तैयार प्रस्ताव में पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम की बात कही है। यह पाठ्यक्रम सीधे 12वीं के बाद ही उपलब्ध होगा।

साथ ही इसके लिए लेटरल एक्जिट का प्रावधान भी होगा। तीन साल के बाद कोई कोर्स छोड़ना चाहे तो वह छोड़ सकेगा और उसको उसकी योग्यता के मुताबिक प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जाएगा। यूजीसी ने 12वीं पंचवर्षीय योजना में स्पष्ट रुप से पांच साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके पीछे यूजीसी की सोच ग्रॉस एनरॉलमेंट अनुपात को बढ़ाना और अच्छे शोधकर्ताओं और शिक्षकों को तैयार करना है।

इस योजना के मुताबिक इस कोर्स की अवधि पांच वर्ष की होगी और उसमें लेटरल एक्जिट (बाहर आने) की सुविधा मिलेगी। यदि किसी कारणवश छात्र तीन साल में इसे छोड़ना चाहें तो वह ऐसा कर सकता है। उसे योग्यतानुसार सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा। वहीं, यूजीसी ने छात्रों को ज्यादा विकल्प उपलब्ध कराने के लिए कॉलेजों और विवि में ईवनिंग शिफ्ट शुरू करने का खाका भी तैयार किया है।

यूजीसी का मानना है कि एक शिफ्ट में चलने वाले संस्थानों में 16 से 18 घंटे गैर उपयोगी रहते हैं। लिहाजा ऐसे में इन संस्थानों में दूसरी पाली शुरू की जा सकती है। यूजीसी की योजना के मुताबिक कॉलेजों में दूसरी पाली के लिए अलग से शिक्षकों का इंतजाम किया जाएगा। वहीं, विश्वविद्यालयों के विभागों में स्नातकोत्तर और डिप्लोमा पाठ्यक्रम को शुरू किया जा सकता है। यह पाठ्यक्रम ऐसे होंगे जो विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले प्रोफेशनल छात्रों के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।

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