हेमा मालिनी को देखने और सुनने के लिए बेताब दिखे बुजुर्ग सांसद
दिल्ली
(ब्यूरो)। गंभीर से गंभीर मामले में संसद से गैरहाजिर रहना या बहस के दौरान ऊंघना यहां तक कि खर्राटे भरना सांसदों के लिए आम बात है, लेकिन जब राज्यसभा में ड्रिम गर्ल हेमा मालिनी बोलने के लिए खड़ी हुई तो सभी बुजुर्ग सांसद तन्मयता से उन्हें सुनने और देखने लगें। id="toptextpromo">राज्यसभा
में अमूमन चुप रहने वाली भाजपा सांसद अभिनेत्री हेमा मालिनी के बोल वचन सुनने के लिए सदन के ज्यादातर सदस्य आतुर रहते हैं।बजट चर्चा के दौरान कला और संस्कृति पर बोलने के लिए उठी हेमा मालिनी को जब पीठासीन अधिकारी पी जे कुरियन ने थोड़े समय में अपनी बात रखने को कहा तब ज्यादातर सांसदों को यह नागवार गुजरा। वे हेमा मालिनी की ओर से समय सीमा बढ़ाने की मांग करने लगे। ऐसा विपक्ष ही नहीं बल्कि दूसरे दलों के नेताओं ने भी किया। समय सीमा की बाध्यता बताने वाले पीठासीन अधिकारी ने नेताओं की बात मानी और उन्हें समय से ज्यादा बोलने का अवसर दे दिया। id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'> id='top-searched-articles'>राज्यसभा
में दोपहर बाद बजट पर होने वाली चर्चा में ऐसे तो काफी कम सदस्यों ने भाग लिया। लेकिन हेमा मालिनी के भाषण के दौरान सदन में सदस्यों की संख्या जरूर बढ़ गई थी। कला और संस्कृति क्षेत्र की अपेक्षाओं पर ड्रीम गर्ल को निहारते हुए बड़ी दिलचस्पी से उनका भाषण भी सुन रहे थे। चर्चा के दौरान हेमा ने भारतीय फिल्म जगत को पूर्ण रुप से उद्योग का दर्जा देने की सिफारिश की। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से फिल्मों के बजट, वीजा और विदेशों में शूटिंग की व्यवस्था के लिए भारतीय फिल्म उद्योग को बड़ी राहत मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि बजट में सांस्कृतिक धरोहर के लिए कुछ खास प्रावधान नहीं किया गया। ऐसे में जबकि देश में लोक महोत्सव में कमी आ रही है, इसे संस्कृति का कमजोर होना ही समझा जाएगा।











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