जनरल वीके सिंह के मुद्दे पर सरकार असमंजस में

सरकार के साथ टकराव की राह पर काफी आगे बढ़ चुके सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह को मार्चिंग ऑर्डर देने को लेकर सरकार ऊहापोह में फंसी हुई है। सरकार इस दुविधा में है कि घूसकांड और लेटर बम से सरकार पर प्रहार कर रहे जनरल को चलता कर दिया जाए या फिर उन्हें लंबी छुट्टी पर भेजकर राहत की सांस ली जाए। उम्र विवाद के बाद से ही लगातार सरकार की मुश्किलें बढ़ा रहे जनरल के भविष्य पर फैसला तो अब बृहस्पतिवार को हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन के बाद ही होगा। लेकिन यह तय है कि 31 मई को रिटायर हो रहे सेनाध्यक्ष को बर्खास्त करने पर सरकार में आम सहमति नहीं बन पा रही है। लेकिन ज्यादा संभावना है कि जनरल को रिटायर होने दिया जाएगा।
सरकार की यह दुविधा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रक्षामंत्री एके एंटनी के बीच हुई मुलाकात में भी उजागर हुई। सेना का खस्ताहाल बताने वाले जनरल के पीएम को भेजे खत पर मचे बवाल के बीच हुई इस मंत्रणा में गृहमंत्री पी चिंदबरम और रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार जनरल की बर्खास्तगी को लेकर दबाव बना रहे सियासी दलों के तर्क भी इस बैठक में उभर कर आए। लेकिन सरकार के भीतर ही जनरल को हटा देने पर आम सहमति का अभाव नजर आ रहा है। जनता यू भी जनरल को हटाने के पक्ष में है, लेकिन भाजपा खिलाफ है।
कुछ वरिष्ठ मंत्रियों की सलाह तो यही आई है कि जनरल के रिटायर होने का इंतजार करना चाहिए और इससे पहले उन्हें बर्खास्त करने से बात बिगड़ना ही तय है। भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रही सरकार के दामन पर ईमानदार छवि वाले सेना प्रमुख को हटाने का दाग लगने का खतरा भी कुछ मंत्री बता रहे हैं। आखिरकार सेनाध्यक्ष ने घूस की पेशकश का खुलासा कर सेना में भ्रष्टाचार की तरफ ही इशारा किया है। वहीं कुछ मंत्रियों की राय है कि अगर पीएम को लिखे खत में उन्होंने सेना के पास गोला बारूद का अभाव बताया है तो उन्होंने अपनी जिम्मेवारी ही निभाई है।
सूत्रों के अनुसार कुछ औरों का कहना है कि रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके सेनाध्यक्ष को हटाकर उन्हें शहीद बनने का गौरव हासिल करने का मौका नहीं दिया जाना चाहिए। सूत्रों के अनुसार जनरल का सीधे पीएम को खत लिखे जाने को अनुशासनहीनता करार देने से भी रक्षा मंत्रालय के अधिकारी परहेज नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह एक तरह से रक्षामंत्री की अनदेखी किए जाने का नमूना है। यही नहीं रक्षा इंतजाम का बुरा हाल होने का खुलासा कर यह संदेश देने की कोशिश जनरल ने की है कि फैसलों के मामले में सरकार सुस्त चल रही है। सूत्रों के अनुसार सरकार के कुछ शीर्ष मंत्री उम्र विवाद के समय से ही जनरल सिंह के रवैये को आधार बनाकर यह कह रहे हैं कि उन्होंने हद पार कर दी है और बर्खास्तगी से सेना को संदेश देना चाहिए ताकि ऐसा आगे न हो।












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