सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, लीना गौरव बनीं सेना में अफसर

Women Army
दिल्ली (ब्यूरो)। मेजर लीना गौरव केथल सेना में अफसर बन गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद यह हो पाया है। कोर्ट ने महिलाओं को सेना में स्थायी कमीशन में रोड़ा अटकाने पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने सैन्य बल न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ दायर सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद मेजर लीना सेना की गिनी-चुनी स्थायी कमीशन प्राप्त अफसर हो जाएंगी।

के लिए सेना की अनिवार्य विभागीय परीक्षा को नकारते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आर्मी में महिलाओं के रास्ते में रोड़ा अटकाने के लिए केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। मेजर लीना गौरव केथल सेना में स्थायी कमीशन को हरी झंडी देते हुए सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में झंडा लहरा रही हैं। इसके बावजूद उनके सेना में आगे बढ़ने के रास्ते में बाधा क्यों डाली जा रही है? अदालत ने सैन्य बल न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ दायर सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद मेजर लीना सेना की गिनी-चुनी स्थायी कमीशन प्राप्त अफसर हो जाएंगी।

जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार से कहा कि आखिर महिलाओं के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। उन्हें स्थायी कमीशन देने में रोड़े क्यों अटकाए जा रहे हैं। सरकार सेना में महिला अफसरों को प्रोत्साहित क्यों नहीं करती। आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में सेना में बेहतर मौके देकर उनका उत्साहवर्धन करना चाहिए, लेकिन सरकार इसके बजाय बाधाएं पैदा कर रही है। गौरतलब है कि मेजर लीना को 14 साल के शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के बाद स्थायी कमीशन मिलेगा।

सशस्त्र सैन्य बल न्यायाधिकरण की लखनऊ पीठ ने 18 अप्रैल, 2011 को मेजर लीना गौरव को स्थायी कमीशन देकर उन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में पदोन्नत करने का आदेश दिया था, लेकिन पदोन्नति के बजाय सरकार और रक्षा मंत्रालय ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सरकार का कहना था कि मेजर लीना को स्थायी कमीशन के लिए जज एडवोकेट जनरल (जेएजी) शाखा की विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करना जरूरी है। दूसरी ओर, मेजर लीना का कहना था कि सरकार जिस परीक्षा की बात कर रही है। उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण जेएजी की आंतरिक परीक्षा वह पहले ही पास कर चुकी हैं। सर्वोच्च अदालत ने सरकार के इस तर्क को सिरे से नकार दिया कि मेजर लीना को जेएजी की विभागीय परीक्षा के बिना स्थायी कमीशन नहीं दिया जा सकता। महिला अफसर का कहना था कि विभागीय परीक्षा से उच्च स्तर की परीक्षा (पदोन्नति परीक्षा) वह पहले ही पास कर चुकी हैं। दोनों परीक्षाओं के कोर्स के आधार पर उन्होंने यह साबित किया कि विभागीय परीक्षा, पदोन्नति परीक्षा से निम्नवत है। गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट के 12 मार्च, 2010 के फैसले के बाद महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का रास्ता साफ हुआ था। हाईकोर्ट ने महिलाओं को स्थायी कमीशन न देने के सेना के नियम को असंवैधानिक करार दिया था। उसके बाद सरकार ने जेएजी, आर्मी एजूकेशन कॉर्प (एईसी) तथा उसके समकक्ष नौसेना और वायुसेना के विभागों में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने की अधिसूचना जारी की थी। इससे पहले एसएससी महिला अफसरों को स्थायी कमीशन नहीं मिल पाता था। हाईकोर्ट ने लीना गौरव की याचिका पर ही यह फैसला दिया था।

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