मुलायम की लायन सफारी- बीहड़ में गूंजेगी शेर की दहाड़

Lion
लखनऊ। कभी जिन बीहड़ क्षेत्रों में गोलियों की आवाजें सुनायी पड़ती थी वहां अब शेरों की दहाड़े सुनायी पड़ेगी। यहा जल्द की सैलानी लायन सफारी का लुत्फ ले सकेंगे। बीहड़ क्षेत्रों में लायन सफारी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव की स्वप्निल परियोजनाओं में एक है। उम्‍मीद की जा रही है कि सपा की सरकार बनने के बाद यह क्षेत्र पर्यटन के नक्शे में एक विशेष स्थान रखेगा।

मुलायम सिंह यादव ने अपने गृह जिले इटावा समेत पूरे उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने तथा बीहड़ों को डकैतों से मुक्त कराने के लिये शेर यानी (लायन) सफारी परियोजना का जो सपना देखा था। वह अब पूरा सकता है। मुलायम ने अपने कार्यकाल में इस परियोजना की रूपरेखा तैयार की थी लेकिन मायावती की सरकार ने इस पर विराम लगा दिया।

मुलायम सिंह यादव ने 2004 में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में लायन सफारी बनाने का सपना देखा था। यह परियोजना आसान नहीं थी। इसके लिये केन्द्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय तथा उच्चतम न्यायालय की अनुमति आवश्यक थी। इस स्वप्निल परियोजना को साकार करने का बीड़ा वन विभाग ने उठाया था। इस परियोजना से मुलायम ने एक तीर से दो शिकार करने की सोची थी। लायन सफारी बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलता और दूसरे इटावा का विकास होता। दूसरे बीहड़ में दशकों पुरानी चल रही डाकुओं की समस्या से भी जनता को छुटकारा मिल जाता।

मुलायम सिंह यादव का यह सपना हकीकत में बदलता कि उसके पहले ही सत्ता परिवर्तन हो गया। वो चाहते थे कि उनके गृह जिले में परिस्थतियां प्रतिकूल होने के बावजूद भी लायन सफारी बनाया जाये लेकिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1962 के तहत अनुसूची एक में शामिल देश के बचे शेरों को उच्चतम न्यायालय इटावा भेजने को तैयार नहीं था। केन्द्रीय वन्यजीव प्राधिकरण और उच्चतम न्यायालय की अनुमति ले ली। अनुमति के साथ ही न्यायालय ने शेर प्रजनन केन्द्र बनाने की शर्त रख दी।

बहरहाल अब सपा सरकार बनने पर एक बार फिर उम्‍मीद की जा रही है कि यह सपना पूरा होगा। इटावा के जंगलों के 150 हेक्टेयर क्षेत्र में परिस्थितियों को शेरों के अनुकूल बनाने और प्रजनन केन्द्र समेत लायन सफारी परियोजना के लिये 18 करोड़ की धनराशि निश्चि की गयी, जिसमें पांच करोड़ की धनराशि अवमुक्त भी कर दी गयी। पांच करोड़ 60 लाख के बजट वाली इस परियोजना में तालाब और घास के मैदान विकसित कर क्षेत्र को शेरों के आवास के अनुकूल बनाना था।

पर्यटक शेरों को नजदीक से देख सकें इसके लिये भी व्यवस्था की जानी थी। परियोजना के अनुसार वॉच टॉवर बनाये जायेंगे और सफारी में घूमने के लिये वैन की व्यवस्था भी होगी। बबूल के कांटेदार जंगलों को चौडी पत्ती वाले पेड़ों में स्थानान्तरित कर सफारी के अन्दर वाहनों और हाथियों पर बैठकर शेरों को विचरण करते देखा जा सकेगा। यह अपने आप में अद्भूत होगी क्योंकि उत्तर भारत में केवल एक लायन सफारी चंडीगढ़ में है। वन्य जीव से जुड़े लोगों का कहना है कि यूपी में लायन सफारी खोले जाने से लोगों को वन्यजीवों के संरक्षण के बारे में जागरुक किया जा सकेगा।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक लायन सफारी शुरु होने से पहले प्रजनन केन्द्र को प्रमुखता दी जा रही थी। लायन सफारी के लिए 1.5 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रजनन केन्द्र बनाया जायेगा जिसमें 10 साल तक ब्रीङ्क्षडग कराई जायेगी। शेरनी दो साल में एक बार बच्चे देती है। नवजात बच्चों में मृत्यु दर लगभग 80 प्रतिशत होती है। अत: दस साल तक लगातार ब्रीडिंग कराने के बाद जो भी बच्चे सलामत रहेंगे उन्हें सफारी में छोड़ा जायेगा। सपा सरकार में अगर यह योजना शुरू हो पायी तो निश्चित ही यह बड़ी उपलब्धि होगी। इटावा पूरे राज्य में पर्यटकों का मु य केन्द्र होगा। बीहड़ से डाकुओं की समस्या का हमेशा के लिये खात्मा हो जायेगा।

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