सपा की हिदायत- शासन को गुंडाराज न कहें मायावती

प्रदेश के करोड़ों मतदाताओं ने उनकी सरकार को फिर सत्ता में आने के लायक नहीं समझा, उनकी जगह समाजवादी पार्टी को सत्ता सिंहासन पर बिठा दिया। जनता के इस निर्णय को बसपा सुप्रीमो अब भी स्वीकारने को तैयार नहीं हैं। चौधरी ने कहा कि बसपा नेत्री बार-बार आशंका जताती हैं कि सपाराज में गुण्डागर्दी बढ़ेगी। यह बयानबाजी करने से पहले उन्हें सोचना चाहिए कि बसपा राज में जितना उत्पीडऩ हुआ है, उसे जनता भूल नहीं पायी है। बसपा शासन में महिलाओं की इज्जत लुटती रही, बच्चियों तक से बलात्कार हुआ, जिसे जनता भूल नहीं पायी हैं।
उन्होंने कहा कि दर्जनभर से ज्यादा विधायक मंत्री अपहरण, हत्या व बलात्कार के अभियोगों में जेल में बंद हैं। लोकायुक्त की जांच के बाद भ्रष्टाचार में दो दर्जन मंत्री सरकार के बाहर हुए। बसपा सरकार के समय पार्टी में 500 अपराधियों के होने की सूचना खुद मायावती ने दी थी, इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सपा प्रवक्ता ने कहा कि मायावती ने समाज के हर वर्ग को अपमानित किया है। उन्हें अपने शासनकाल की तमाम कलंक कथाओं पर शॄमदगी जतानी चाहिए थी। उन्होंने किसी पीडित दलित महिला से भी मिलना पसन्द नहीं किया।
विधायक और मंत्री भी उनसे नहीं मिल पाये। बसपा राज में गुण्डागर्दी की जो छूट थी बसपा अध्यक्ष आगे भी उसे जारी रहने देना चाही हैं लेकिन सत्ता स भालने जा रहे अखिलेश यादव ने यह बात साफ कर दी है कि समाजवादी पार्टी के राज में अपराधियों की जगह सिर्फ जेल होगी या वे राज्य की सीमा से बाहर हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जायेगी। प्रदेश में कानून व्यवस्था का राज कायम होगा। उन्होंने पार्टी के अन्दर भी ऐसे तत्वों के आने पर बंदिश लगाकर अपना इरादा पहले ही जाहिर कर दिया था। मायावती को उन्होंने सलाह दी कि उन्हें अनर्गल प्रलाप बन्द करना चाहिए और लोकतंत्र का स मान करना सीखना चाहिए।












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