संघ प्रमुख ने धुलवाए आदिवासी महिलाओं से पैर

इस मामले पर विरोध बढ़ता देख आरएसएस ने अपनी सफाई पेश की है। संघ प्रवक्ता का कहना है कि यह आदिवासियों की परंपरा है। जिसके तहत वे अपने यहां आने वाले मेहमानों के पैर धोती हैं। जो लोग इस पर बयानबाजी कर रहे हैं उन्हें आदिवासियों की परंपरा के बारे में पता नहीं है। यह उनके स्वागत करने का अपना तरीका होता है।
जो महिलाएं इस रामकथा में मोहन भागवत के पैर धो रही हैं वे झारखंड और उड़ीसा से आई थीं। अयोध्या के बहुत से साधुओं ने मोहन भागवत के इस कदम का कड़ा विरोध किया है।












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