यूपी में बसपा अध्यक्ष की प्रतिष्ठा दांव पर
स्वामी प्रसाद मौर्य ने चुनाव में आश्वासनों की झड़ी लगा दी थी जिनके पूरा न होने की वजह से जनता में रोष है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो उनका गुस्सा उनके चुनाव परिणाम के लिये भारी पड़ सकता है। वहीं जनता की बेरूखी के साथ ही विरोधियों की सक्रियता भी उन पर भारी पड़ती दिख रही है। केन्द्रीय मंत्री आर.पी.एन.ङ्क्षसह की सिफारिश पर टिकट पाये कांग्रेस प्रत्याशी राजेश जायसवाल तथा सपा के प्रत्याशी पूर्व सांसद बालेश्वर यादव के पुत्र बबलू हैं जो बड़े नेताओं का समर्थन प्राप्त होने के कारण मौर्य को कड़ी चुनौती दे रहे हैं।
मौर्या की मुख्य लड़ाई सपा व कांग्रेस उ मीदवार से ही मानी जा रही है। वहीं भाजपा ने पुराने कार्यकर्ता रामधारी गुप्ता को उतारा है जो बहुत अच्छी स्थिति में नहीं नहीं कहे जा सकते है। उधर कुंवर आरपीएन ङ्क्षसह व बालेश्वर यादव ने इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है और इनकी सक्रियता इसी से समझी जा सकती है कि वे जनसंपर्क में यह कहने से गुरेज नहीं कर रहे हैं कि चुनाव में खुद वे ही लड़ रहे हैं।
आर.पी.एन. सिंह की राहुल गांधी से नजदीकी भी चर्चा का विषय है और उनके वायदों को गंभीरता से लिया जा रहा है। मौर्य के लोगों की नाराजगी की मु य वजह यह है कि तीन साल पहले हुए उपचुनाव में बसपा के बड़े नाम को जीत बड़े-बड़े वायदों से ही मिली थी। बसपा की सरकार होने के चलते लोगों को उ मीद थी कि पार्टी में मिनी मु यमंत्री की हैसियत रखने वाले स्वामी प्रसाद मौर्या विकास की गंगा बहाएंगे जो हुआ नहीं।
मौर्य ने बिजली, चमचमाती सड़क व इंसेफेलाइटिस से जूझ रहे इलाके में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का वायदा किया था । गोरखपुर मंडल में महामारी का पर्याय बन चुके इंसेफेलाइटिस की मूल वजह प्रदूषित पानी बनकर उभर रहा है पर पानी मुहैया कराने की एक भी योजना विधानसभा क्षेत्र में नहीं शुरू हो सकी। लोगों के गुस्से का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुस्लिम बाहुल्य गांव खिरिया टोला पहुंचे स्वामी प्रसाद मौर्या से ग्रामीण मारपीट पर उतारू हो गए थे। लोगों का आरोप था कि स्वामी के लोग गांव में पैसा बांटने आए थे। बाद में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्वामी सुरक्षित निकले।
विधानसभा का जातीय समीकरण भी स्वामी के लिए मुश्किलें पैदा करने वाला है। विधानसभा में सर्वाधिक आबादी मुस्लिमों व ब्राहमणों की है। पिछड़ी जातियों में सैथवार, कुशवाहा और यादव भी निर्णायक साबित होने वाले हैं। वीआईपी सीट होने के कारण कांग्रेस बसपा व सपा के दिग्गज नेता यहां अपनी अपनी चुनावी सभाएं कर चुके हैं जिनमें राहुल गांधी, मायावती व अखिलेश यादव प्रमुख हैं। अपनी पार्टी को जिताने के साथ ही अपनी सीट बचाने में भी बसपा के प्रदेश प्रमुख को एडी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।













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