सुबह से शाम तक चलता है 'मिशन गैस सिलेंडर'

LPG Cylinder
हिसार/सिरसा। सर्दियों को मौसम क्या आया आम आदमी के लिए नई मुसिबत ले आया। ठंड तो ठंड रसोई गैस की किल्लत एक नई परेशानी बन जाती है। प्रदेश के अनेक जिलों में आम आदमी कुछ ऐसे ही हालतों से जूझ रहा है। जिसकी जान-पहचान होती है वह गैस सिलेंडर मंगवा लेता है लेकिन घर की रसोई के लिए आम आदमी का 'मिशन गैस सिलेंडर' सुबह से शाम ढलने तक चलता है। कई कामकाजी उपभोक्ता ऐसे भी हैं जिनको इस मिशन की कामयाबी के लिए नौकरी से एक दिन की छुट्टी भी लेनी पड़ती है। मगर शहर में ऐसे तथाकथित उपयोगकर्ता हैं जो इस मिशन के न तो हिस्सा हैं और न ही वे इन घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग रसोई गैस में करते हैं। इनका काम वाहनों में अवैध रूप से रसोई गैस भरने का होता है।

वाहनों में गैस रिफिलिंग सेंटर की तुलना में कम पैसा लेकर ये लोग इन गैस सिलेंडरों का व्यवसायिक उपयोग करते हैं। वाहनों में अवैध रूप से गैस भरने वाले ऐसे दर्जनों रिफिलिंग सेंटर शहर में खुले हैं और प्रशासन की नाक तले यह अवैध धंधा खुलेआम चल भी रहा है। हैरत की बात नहीं है कि ये वे सेंटर हैं, जहां आम आदमी की एक बार शिकायत पर कार्रवाई तो हुई और बाद में यहां गैस की अवैध रिफिलिंग सेंटर का स्थाई ठिकाना बन गया। छायाकार और पत्रकार मौके पर पहुंचे तो उन्हें एक व्यक्ति ने यह तक कह दिया कि इससे क्या होगा? फोटो खींचने से कुछ नहीं होता। ये काम तो ऐसे ही चलते रहेंगे। कोई कार्रवाई नहीं हो सकती।

करीब 7,8 महीने पहले हिसार के पुराने रेलवे ओवरब्रिज के नीचे रसोई गैस सिलेंडर के व्यवासायिक उपयोग स्थल से दर्जनों सिलेंडर पुलिस ने बरामद किए थे। आज यह स्थिति है कि जहां पहले वाहनों में गैस रिफिलिंग करते वक्त दो-तीन आदमी मौके पर खड़ रहते थे और गैस पाइप और वाहन के रिफिलिंग वाली जगह को किसी चीज से छिपा दिया जाता था, आज न तो उसे छिपाया जाता है और न ही कोई पहरेदारी के लिए वहां खड़ा होता है। इसी तरह राजगढ़ रोड स्थित शॉपिंग कॉम्पलेक्स, मॉडल टाउन, अर्बन एस्टेट क्षेत्र व शहर के अन्य इलाकों में ऐसा काम चल रहा है।

इन जगहों पर आम उपभोक्ता के लिए करीब 400 रुपए में एजेंसी से मिलने वाला गैस से भरा सिलेंडर 700 रुपए या फिर उपभोक्ता की जेब के अनुसार और अधिक की कीमत का हो जाता है। यहां इस गैस सिलेंडर का उपयोग घर की रसोई में नहीं बल्कि वाहनों में ईंधन के रूप में प्रयोग होता है। इस बारे में अतिरिक्त उपायुक्त अशोक मीना ने बताया कि ऐसे मामलों में गैस एजेंसी कंपनी के अधिकारी और जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग मिलकर करता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जल्द ही प्रशासन अपने स्तर पर भी अभियान चलाने जा रहा है। जब उनसे पूछा गया कि प्रशासन यह अभियान कब से शुरू करेगा तो उन्होंने कहा कि यह सीक्रेट होगा, जो अभी बताना ठीक नहीं है।

ऐसे शुरू होता उपभोक्ता का 'मिशन गैस सिलेंडर'

आम आदमी को जब उसके घर की रसोई में गैस सिलेंडर को लगे 20 दिन हो जाते हैं तो उसकी गैस सिलेंडर लेने की जुगत तभी से शुरू हो जाती है। उसे पहले तो गैस एजेंसी में बुकिंग के लिए लंबी कतार में लगता है। घंटों लाइन में लगने के बाद नंबर लिखवाकर आता है और 28 दिन खत्म होने पर बुकिंग का नंबर आने के चक्कर शुरू होते हैं। नंबर आने पर सिलेंडर लेने के लिए पर्ची कटवाने में घंटों लाइन में लगते हैं। एक दिन में नंबर आ जाए तो दोपहर बाद सिलेंडर लेने के लिए गैस एजेंसी गोदाम पर लंबी लाइन में लगते हैं फिर सिलेंडर मिलता है। जब सिलेंडर मिलता है तो उपभोक्ता का गैस गोदाम संचालक से अगला प्रश्न यही होता है कि साहिब, अब सिलेंडर के लिए बुकिंग कितने दिन में करवा सकते हैं। निर्धारित समय अवधि के बाद फिर शुरू हो जाता है 'मिशन गैस सिलेंडर'।

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