मंदिर मुद्दे ने फिर कमजोर किया भाजपा को
उत्तर प्रदेश की चुनावी जंग में पूरी तरह ठंडी पड़ चुकी भारतीय जानता पार्टी ने एक बार फिर मंदिर मुद्दा उठाया है। घोषणा पत्र जारी करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि हिन्दुत्व भाजपा की रग-रग में है और इसीलिए यदि हमारी सरकार बनी तो अयोध्या में मंदिर जरूर बनायेंगे। यही नहीं ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण के अंतर्गत मुस्लिमों को दिये जाने वाले 4.5 प्रतिशत आरक्षण का भी विरोध दर्ज किया है।
इन दो बातों से साफ हो गया है कि भाजपा को प्रदेश के मुसलमानों का वोट नहीं चाहिये। उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या में 18 प्रतिशत मुसलमान हैं। आंकड़ों की बात करें तो अगर यूपी में 50 फीसदी वोट गिरता है, और गिरे हुए वोटों में 30 प्रतिशत भी मुसलमानों के हुए, तो भाजपा का पत्ता यूपी से साफ होने में कोई नहीं रोक सकता। यह इसलिए भी क्योंकि दलित वर्ग व यादवों की पहली पसंद बसपा, सपा या कांग्रेस ही होगी।
इन जातिवादी समीकरणों के बाद अगर यूपी के युवाओं की बात करें तो वहां भी भाजपा पीछे रह गई है। यूपी बोर्ड से इंटर पास करने वाले हर वर्ग के छात्र को सपा जहां मुफ्त में लैपटॉप दे रही है, वहीं भाजपा ने सिर्फ गरीबों को लैपटॉप देने की बात कही है। बाकियों को लैपटॉप पाने के लिए 5000 रुपए देने होंगे।
इसके अलावा वो युवा आज बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और महंगाई से त्रस्त है, उन्हें मंदिर-मस्जिद से ज्यादा खुद के कॅरियर की चिंता सताती है। यह इसलिए भी क्योंकि 1992 में जब बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी, तब यही युवा पालने में झूल रहे होंगे। तमाम युवाओं के दिमाग से वो वाक्या बचपन की यादों की तरह साफ हो गया होगा। लेकिन भाजपा शायद नहीं चाहती कि कोई मंदिर मस्जिद के मुद्दे को भुला पाये। शायद इसीलिए हर चुनाव के मौकों पर वो मंदिर का मुद्दा उठा लाती है। और हर बार हारती भी है।
खैर इस बार क्या होगा, यह तो वक्त बतायेगा, लेकिन यह साफ है कि भाजपा जनाधार बटोरने में कमजोर जरूर हो गई है। अब अगर यूपी के सारे हिन्दू एक होकर भाजपा को वोट दें सिर्फ तभी यह हिन्दूवादी पार्टी जीत सकती है। और यह अब असंभव स हो गया है।













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