26 जनवरी को चांद की बाहों में दिखेगा पुराना चांद

अर्धचंद्राकार चांद के आकाश में नजर आने पर लोग चांद के उस भाग को भी देख पाएंगे, जो सूर्य की रौशनी से प्रकाशित नहीं होगा बल्कि धरती से प्रतिबिंबित होने वाली सूर्य की रौशनी से प्रकाशित होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को कई बार नए चांद की बांहो में पुराना चांद भी कहा जाता है। ऐसे दृश्य दुर्लभ होते है, बहुत समय के आंतराल पर दिखाई देते है।
अभी हाल ही में सौर मंडल के बाहर सूरज जैसे एक तारे की परिक्रमा लगाते दो ग्रहों की पहचान की गई थी जो आकार में पृथ्वी सरीखे हैं। नासा के केपलर अभियान में इन ग्रहों के पाए जाने से अन्यत्र कहीं जीवन होने के उत्साहजनक संकेत मिले हैं। केपलर 20ई और केपलर 20एफ नाम के ये ग्रह अपने सितारे से उतनी दूरी पर स्थित हैं।












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