बैंकों को छह सप्ताह में मिल जाएगी ठौर

जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को अदालत में पेश हुए नोएडा प्राधिकरण के कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) से कहा कि यह आपकी जिम्मेदारी होगी कि तय समय में आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाए। यदि अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं होता तो यह जिम्मेदारी सीईओ की मानी जाएगी।
पीठ ने कहा कि प्राधिकरण प्रभावित बैंकों को व्यावसायिक स्थान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया दो सप्ताह में शुरू करे और चार सप्ताह के भीतर पारदर्शी तरीके आवंटन कर अदालत को इस बारे में सूचित करे। पीठ ने सीईओ से कहा कि आपने अदालत का फैसला कब देखा और अनुपालन के लिए क्या कदम उठाए। इस संबंध में भी प्राधिकरण अपना रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत करें। मालूम हो कि 9 जनवरी की सुनवाई में शीर्ष अदालत ने सीईओ को सुनवाई के दौरान पेश होने का आदेश दिया था।
सर्वोच्च अदालत ने 5 दिसंबर, 2011 को नोएडा के रिहायशी इलाकों में बैंक, गेस्ट हाउस, नर्सिंग होम व अन्य व्यावसायिक सेवाएं चलाने पर रोक लगाने और दो माह के भीतर स्थानांतरित करने का फैसला दिया था। अदालत के आदेश के अनुपालन की मियाद पहले 5 फरवरी तक थी जो अब बढ़कर मार्च के पहले सप्ताह तक पहुंच गई है। इस मुद्दे पर भारतीय स्टेट बैंक सहित 19 बैंकों ने अदालत में एक आवेदन दाखिल किया है जिसमें उनका पक्ष सुने जाने और आवासीय क्षेत्रों से स्थानांतरित करने समय बढ़ाने की मांग की गई है।
गौरतलब है कि बैंकों ने आवेदन में कहा है कि उनकी सेवाएं रिहायशी इलाकों से हटाए जाने की वजह से डेढ़ लाख उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उनके लिए भी यह समस्या हो गई है कि वह अपने पुराने उपभोक्ताओं के लिए नया सुविधाजनक स्थान कहां से लाएं। जबकि ऐसा न करने पर बहुत से उपभोक्ता बैंकों से अपना खाता हटाने को मजबूर हो जाएंगे।












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