चुनाव प्रचार का नया फंडा फेसबुक

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दिल्ली। वोटरों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए फेसबुक नया माध्यम बन गया है। खासकर पंजाब के प्रत्याशी फेसबुक का ज्यादा सहारा ले रहे हैं। यूपी में इसकी संख्या कम है, लेकिन उम्मीद है जल्द ही यह फंडा यूपी में भी चल पड़ेगा। लेकिन सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट आरकुट का बुरा हाल है। फेसबुक जबरदस्त रूप से हावी है।

विधानसभा चुनाव-2012 में प्रत्याशी अब बैनर और पोस्टर से निकलकर सोशलनेटवर्किंग वेबसाइटों तक पहुंच गए हैं। पंजाब में उम्मीदवार ही नहीं कई राजनीतिक दलों ने भी फेसबुक, गूगल प्लस और यू-ट्यूब के जरिये प्रचार कर युवा वोटरों को रिझाने की कोशिश शुरू कर दी है। हाईटेक तरीकों से लोकप्रियता बढ़ाने के लिए कुछ दलों ने अपने चुनावी अभियान समूह में इंटरनेट के जानकारों को भी शामिल किया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड भी इससे अछूते नहीं हैं। लेकिन इंटरनेट से प्रचार में पंजाब में सबसे आगे है।

विधानसभा चुनाव में हर उम्मीदवार के प्रचार खर्च पर निर्वाचन आयोग ने भले ही पैनी नजर है। ऐसे में सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट की आधुनिक तकनीक युवा वोटरों के बीच पैठ बनाने के लिए राजनीतिक दलों के लिए वरदान साबित हो रही है। आयोग इस माध्यम के खर्च पर सवाल भी नहीं कर सकता, क्योंकि इंटरनेट की इन वेबसाइटों के उपयोग के लिए प्रत्याशियों को खर्च नहीं करना पड़ता। पंजाब में अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल, उनके बेटे सुखबीर और बीबी जागीर कौर भी वेबसाइटों में छाए हुए हैं।


इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह, राजेंदर कौर भट्ठल, भाजपा नेता नवजोत कौर सिद्धू और मनोरंजन कालिया भी सोशल नेटवर्किंग साइट में जोशीले तेवरों के साथ हैं। चुनाव के दौरान इंटरनेट से प्रचार उम्मीदवार की ओर से ही किया जा रहा है, ऐसा दावा आयोग की ओर से भी नहीं किया जा सकता। क्योंकि इंटरनेट पर प्रचार के लिए एक जानकार समर्थक ही काफी होता है।


पंजाब के इस हाईटेक प्रयोग की बयार उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की ओर भीचल पड़ी है। हालांकि अभी तक दोनों राज्यों में कांग्रेस, बसपा और भाजपा के ही कुछ प्रत्याशियों के नाम सोशल नेटवर्किंग साइटों के जरिए वोटरों तक पहुंचे हैं। सायबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल की मानें तो इस माध्यम का इस्तेमाल पश्चिमी देशों में चुनाव के दौरान सालों से किया जा रहा है।


पंजाब में जिन वोटरों तक प्रत्याशी पोस्टर, बैनर और समर्थकों के जरिये नहीं पहुंच सकते, उन व्यस्त पढ़े-लिखे वोटरों तक ऑनलाइन पहुंचना बहुत आसान है। साथ ही एक्सपर्ट चुटकियों में उनके काम को अंजाम देकर वोटरों के सामने बेहतरीन दावेदारी पेश करते हैं। याद रहे कि मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने हाल ही में कहा था कि वोटरों को जागरूक करने के लिएइंटरनेट का सहारा लिया जा सकता है। हालांकि इस विधानसभा चुनाव में आयोग की ओर से इस बाबत कोई कदम नहीं उठाया गया।

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