मानवाधिकार शिक्षा से मिलेगी जातीय भेदभाव को निजात

human rights
नयी दिल्ली। सामाजिक न्याय मंत्रालय ने जाति व्यवस्था को शर्मनाक बताते हुए लोक सेवाओं और अन्य केंद्रीय सेवाओं के प्रशिक्षण संस्थानों सहित विभिन्न स्तरों पर मानवाधिकार शिक्षा देने की सिफारिश की है, ताकि जाति आधारित भेदभाव से निजात मिल सके। मंत्रालय के बारहवीं पंचवर्षीय योजना कार्यकारी समूह की रिपोर्ट में कहा गया है कि जाति व्यवस्था दिलो दिमाग को संकुचित कर देती है।

इसके बुरे असर को ध्यान में रखकर मानवाधिकार शिक्षा को सभी स्तरों पर शिक्षण संस्थानों में शामिल किया जाना चाहिए। अनुसूचित जाति सशक्तिकरण पर कार्यकारी समूह द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों को यह समझने में अवश्य मदद करनी चाहिए कि जाति किसी सम्मान का प्रतीक नहीं है बल्कि यह व्यवस्था शर्मनाक है।

समूह ने सिफारिश की है कि जाति व्यवस्था की मानव विरोधी, राष्‍ट्र विरोधी, जातीय निष्ठा, जातीय पूवार्ग्रह और जातीय बैर भाव की संविधान विरोधी प्रकृति पर जोर देकर सभी स्तरों पर प्रत्येक शिक्षण संस्थान में मानवाधिकार शिक्षा शुरू की जानी चाहिए। इससे समाज में फैली दुस्‍धारणाओं से कुछ हद तक निजात तो मिलेगी, साथ ही यह लोगो में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव को बढ़ावा देगी।

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