मेट्रो के डिजाइन पर कैसे लीक हुई सूचना?

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नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली मेट्रों रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) से जानना चाहा कि मेट्रो कॉरीडोर के खंभों की डिजाइन और ढांचे के नक्शे किस तरह लीक हो गये और उन्हें वेबसाइट पर लगाया गया। इसने जानना चाहा कि डीएमआरसी दावा करती रही है कि इस तरह की सूचना का आरटीआई कानून के तहत खुलासा नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति पी. सदाशिवन और जे. चेलामेश्वर की पीठ ने कहा कि क्या यह जानने का प्रयास किया गया कि यह कैसे लीक हुआ और इसे वेबसाइट पर लगाया गया। आप पता लगा सकते हैं। साथ ही पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें डीएमआरसी से दक्षिण दिल्ली के जमरूदपुर में जुलाई 2009 में मेट्रों के एक खंभे के ढहने की सूचना को सावर्जनिक करने को कहा गया था। इस दुघर्टना में छह लोगों की मौत हो गयी थी।

डीएमआरसी ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ के एक अगस्त 2011 के फैसले को चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत इस तरह की सूचना मुहैया कराने में सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है। अटार्नी जनरल जी. इ. वाहनवत्ती ने कहा कि न केवल सुरक्षा कारणों से बल्कि व्यावसायिक कारणों से भी दिल्ली मेट्रों के ढांचे के नक्शे एवं योजना को सावर्जनिक नहीं किया जा सकता क्योंकि इस तरह की आशंका रहती है कि यह गलत हाथों में पड़ सकती है।

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