भाजपा के पूर्व विधायक त्रिपाल धामा की हत्या

त्रिपाल धामा (55) बिनौली गांव के निवासी थे। रविवार को करीब एक बजे वह इंडिका कार से दरकावदा मार्ग स्थित अपने खेत में लगे नलकूप पर गए थे। बताया जाता है कि उन्होंने यहां अखबार भी पढ़ा। सायं करीब चार बजे वहां से गुजर रहे एक किसान ने उन्हें खून से लथपथ देखा और गांव में सूचना दी। बिनौली गांव के प्रधान उनके भाई वेदपाल धामा और परिवार के अन्य लोग वहां पहुंचे, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
सूचना पर पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। पूर्व विधायक के सीने और कनपटी पर दो गोलियां लगी हुई थीं। अधिकारियों द्वारा पूर्व विधायक के परिजनों से बातचीत कर शव को पहले उनके आवास पर लाया गया और बाद में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। हत्याकांड को दो महीने पहले पूर्व विधायक के भतीजों नितिन और सचिन से झगड़े से जोड़ कर देखा जा रहा है। इस झगड़े में एक आरोपी जेल भी गया था। एसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि इस मामले में हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए पांच टीमें गठित कर रवाना कर दी गई हैं। धामा के परिवार से पूछताछ की जा रही है कि उनका किस पर शक है।
त्रिपाल धामा युवावस्था से ही बरनावा क्षेत्र में भाजपा की कमान संभाले हुए थे। उन्होंने 1991 में बरनावा विधानसभा से भाजपा से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 1993 में वह भाजपा की टिकट पर विजयी हुए थे। 1995 में वह जिला पंचायत वार्ड नंबर दो से सदस्य चुने गए थे। 1996 में उन्होंने बागपत लोकसभा से अजित सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा और पराजित हो गए थे। कुछ महीने पहले जैन मुनि के आंदोलन में भी उनकी अग्रणी भूमिका रही थी। वह आसपास के इलाके में लूटपाट करने वालों का भी विरोध करते थे।












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