जयललिता के खिलाफ गैर जमानती वारंट पर रोक

उच्चतम न्यायालय ने मामले में वर्ष 2007 में यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया था। भुवनगरी विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी ने जयललिता के खिलाफ नामांकन दाखिल करने में कथित उल्लंघन से संबंधित मामला दर्ज किया था। द्रमुक के पूर्व सांसद सी कुप्पूस्वामी ने मद्रास उच्च न्यायालय से जयललिता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
उन्होंने कहा था कि जयललिता ने दो से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों के लिए नामांकन दाखिल किया था। उच्च न्यायालय ने 2007 में चुनाव आयोग को संबंधित अदालतों में मामले दाखिल करने का निर्देश दिया था। जयललिता ने उच्चतम न्यायालय में गुहार लगाई जिसने कार्यवाही पर रोक लगा दी। हालांकि न्यायिक मजिस्ट्रेट आर कोमति ने जयललिता के अदालत में पेश नहीं होने पर जून, 2011 में उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया।
इस सप्ताह जब मजिस्ट्रेट के समक्ष मामला आया तो उन्होंने जयललिता के पेश होने पर जोर दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने गुरूवार को कुड्डालूर में प्रधान सत्र न्यायाधीश से निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाने और गैर जमानती वारंट को वापस लेने का अनुरोध किया। सरकारी वकील चाल्र्सराज ने प्रधान सत्र न्यायाधीश के समक्ष याचिका दाखिल कर कहा कि शीर्ष अदालत ने मुख्यमंत्री के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी है। उन्होंने निचली अदालत के फैसले पर स्थगन और गैर जमानती वारंट वापस लेने की मांग की।












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