विडियोग्राफी से करें बीपीएल गणना: नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार को लिखे अपने पत्र के साथ राज्य सरकार की ओर से कराई गई प्रायोगिक आर्थिक जनगणना का ब्योरा भी पेश किया है। हालांकि नीतीश कुमार के फार्मूले से जनगणना कराने में अकेले बिहार को 91 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद की जरूरत पड़ेगी। राज्य सरकार ने सिर्फ एक जिला जहानाबाद में इस फार्मूले के अनुसार जनगणना कराई, जिसके नतीजे के पूरी तरह त्रुटिहीन होने का दावा किया गया है, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पत्र पर कोई संतोषजनक जवाब केंद्र की ओर से नहीं दिया गया है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि बिहार के फार्मूले को फिलहाल अपनाने का औचित्य नहीं है। इससे बजट बहुत बढ़ जाएगा। आर्थिक-सामाजिक जनगणना-2011 के लिए नीतीश फार्मूला यह है कि हर घर से आंकड़े जुटाते समय आडियो व वीडियो रिकॉर्डिग कराई जानी चाहिए, ताकि आंकड़े त्रुटिपूर्ण न होने पाएं। इसके अलावा लोगों की शिकायतों की सुनवाई और उसके निपटारे में सहूलियत और जल्दी हो सके।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक अलग स्वतंत्र व सक्षम आयोग का गठन किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का तर्क है कि केंद्र व राज्य सरकार की लगभग सभी योजनाएं इन्हीं आंकड़ों के आधार पर संचालित होती हैं। इन आंकड़ों की खामियों का मतलब साफ है कि योजनाओं का लाभ उचित लाभार्थी तक नहीं पहुंच पाएगा। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के नाम लिखे पत्र में बिहार के मुख्यमंत्री कुमार ने कहा है कि पिछड़े राज्यों की ज्यादातर ग्रामीण जनता बेहद अशिक्षित है। इनके आंकड़े जुटाने के लिए सक्षम और उनके विश्वास के लोगों का सहारा लिया जाना चाहिए।












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